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वाराणसी

नृत्य नाटक भारतीय परंपरा का एक अंग है -शंकराचार्य शंकर विजयेन्द्र सरस्वती महाराज

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार
वाराणसी। शनिवार कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य शंकर विजयेन्द्र सरस्वती जी महाराज ने आज शनिवार को चेतसिंह किले में चल रहे चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान के 77वे सास्कृतिक कार्यक्रम के क्रम में अपने आशीर्वचन मे कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि नृत्य नाटक कला भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है इसमें समाज का प्रतिबिम्ब दिखता हैं यह मन के विकास के सांथ सांथ मानसिक शांति को प्रदान करता है हम नृत्य नाटक के माध्यम से अच्छे तथा बुरे चरित्र को देख सकते हैं पुरातन समय में नृत्य नाटक परंपरा का प्रचलन तथा प्रोत्साहन समाज के द्वारा होता था आज इसकी पुनरावृत्ति की आवश्यकता है भारत में संम्भावनाये अनंत हैं हमें सही पहचान करने की आवश्यकता है आज के ये युवा कलाकार अपनी पहचान को इसीतरह प्रभावशाली बनायें रख्खे प्रतिभाओं का सम्मान भी समाज के द्वारा आवश्यक हैं आज का यह मंचन दूत वाक्यम् राजदूत के कर्तव्य कूटनीति को दर्शाता है उत्कर्ष उपेन्द्र सहस्रबुद्धे ने मंच का संचालन किया तथा लक्ष मोदक यज्ञ में आज सोलह हजार मोदक से आहुति दी गई इस अवसर पर यज्ञ का संचालन श्री गणेश घनपाठी ने किया धन्यवाद ज्ञापन मठ के प्रबंधक वी एस सुब्रमण्यम मणि ने किया इस अवसर पर मुख्य रूप धीरज पाठक अलकेश पाण्डेय अविनाश पाण्डेय दीपक शुक्ला वैकुण्ठ गौतम गंगा प्रसाद आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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