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गाजीपुर

नहर में पानी छोड़ने से 40 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न

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किसान परेशान – जिम्मेदार कौन?

गाजीपुर। शारदा सहायक नहर रजवाहा एवं इब्राहिमपुर माइनर में बिना सफाई व मरम्मत के पानी छोड़े जाने से क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारी के अनुसार तरवा, रायपुर, राजापुर, इब्राहिमपुर, ओडासन, वृंदावन, नसीरपुर होते हुए बेसव नदी में गिरने वाली शारदा सहायक नहर तथा बिजहरी से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय कर उदंती नदी में मिलने वाली इब्राहिमपुर माइनर की हालत बेहद जर्जर है।

किसानों का आरोप है कि नहर व माइनर की खुदाई और सफाई सही ढंग से नहीं की गई। नहर विभाग द्वारा वर्ष 1986 में इसे चिन्हित किया गया था, जबकि 2024 में लाखों रुपये का आवंटन होने के बावजूद भी खुदाई मूलरूप से सही नहीं हो सकी। इसी लापरवाही का परिणाम है कि वर्ष 2024 और 2025 में बिजहरी ग्राम सभा के दर्जनों किसानों की गेहूं की फसल पानी में डूब गई, जिसमें लगभग 40 बीघा फसल पूरी तरह नष्ट हो गई।

किसानों ने बताया कि इब्राहिमपुर से बिजहरी होते हुए लालजी सिंह के मकान से लेकर खलीलपुर, हुरमुजपुर ग्राम सभा और उदंती नदी तक नहर की खुदाई ठीक से नहीं हुई। ऊपर के क्षेत्रों में नहर की खुदाई व सफाई न होने के कारण पानी छोड़ते ही जगह-जगह रिसाव और नहर टूटने की स्थिति बन जाती है। किसानों का कहना है कि कई स्थानों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी डालकर नहर बनाई गई, जिससे पानी का दबाव पड़ते ही पटरी टूट जाती है और खेतों में पानी भर जाता है।

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इस संबंध में जब किसानों ने विभागीय अधिकारियों से शिकायत की तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जूनियर इंजीनियर उदय कुमार को निरीक्षण और नुकसान की जानकारी दी गई, लेकिन उन्होंने इसे अपने क्षेत्र का मामला न बताकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं, अवकाश प्राप्त उद्योग अधिकारी व बिजहरी निवासी राम जी सिंह ने अधिकारियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए गुणवत्ता और तत्परता पर सवाल उठाए।

राम जी सिंह ने बताया कि नहर खुदाई के समय उन्होंने अपने ट्यूबवेल के मकान को ठेकेदारों, कर्मचारी को निशुल्क खुदाई की शुरुआत और अंत तक  को रहने के लिए दे दिया था, लेकिन कार्य के दौरान ट्यूबवेल की व्यवस्थाएं भी क्षतिग्रस्त कर दी गईं। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर दिशा के गांवों का बरसाती पानी दबाव बनाकर दक्षिण दिशा में नालों के माध्यम से नदी में गिरता था, लेकिन नालों को ढक दिया गया। यदि नहर विभाग द्वारा नीचे से साइफन बनाकर निकासी की व्यवस्था की जाती तो बरसात और सिंचाई दोनों में फसलें बच सकती थीं। निकासी न होने से धान समेत अन्य फसलें हर साल डूब जाती हैं।

किसानों का आरोप है कि बिना समुचित निरीक्षण के ही ठेकेदारों का भुगतान कर दिया जाता है। इसके अलावा नहर में लगे लोहे के गेट पर ताला या सुरक्षा व्यवस्था न होने से कोई भी राहगीर या उपद्रवी गेट खोल देता है, जिससे अचानक पानी छोड़ने पर खेतों में जलभराव हो जाता है। किसानों का कहना है कि जब फसलों को पानी की जरूरत होती है तब नहर सूखी रहती है, लेकिन गेहूं, आलू, सरसों, मटर और चना की फसल तैयार होने के समय ही पानी छोड़ दिया जाता है।

पीड़ित किसानों ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी गाजीपुर और नहर विभाग के आजमगढ़ अधिशासी अभियंता से मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। बिजहरी ग्राम सभा के जिन किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं, उनमें रामाशीष सिंह, संतोष दुबे, बृजनाथ पांडे, मोती राजभर, गिरीश चंद्र दुबे सहित दर्जनों किसान शामिल हैं। किसानों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर लापरवाह अधिकारियों व दोषी ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

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किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही नहर की सही खुदाई, सफाई और निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में भी अन्नदाता इसी तरह नुकसान झेलने को मजबूर रहेगा।

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