गाजीपुर
देवकली ब्लॉक में मनरेगा घोटाले का खुलासा, अधिकारी-प्रधान आमने-सामने
मनरेगा भुगतान में अपात्र लोगों को लाभ, भ्रष्ट तंत्र के आगे नतमस्तक अधिकारी
गाजीपुर। जिले के देवकली ब्लॉक में मनरेगा घोटाला हुआ है। खंड विकास अधिकारी देवकली जमालुद्दीन ने जयदेश संवाददाता पीयूष सिंह मयंक को बताया कि मैंने वित्त वर्ष 2023-24 के लेखा-जोखा से संबंधित अधिकारी को अवगत करा दिया गया है। ग्राम विकास आयुक्त का कहना था कि “वित्तीय वर्ष 2022 और 23 और उसके पहले का भुगतान ही करना था, लेकिन इसका उल्लंघन हुआ है।” लेकिन देवकली के खंड विकास अधिकारी इस तर्क से सहमत नहीं हैं। वैसे भी ग्रामीण स्तर पर मनरेगा में भुगतान ऐसे लोगों को भी किया जाता है जो पात्र नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, बहुत सारे ऐसे मज़दूर हैं जो मनरेगा की गाइडलाइंस को फॉलो नहीं करते हैं, लेकिन ग्राम प्रधानों के भ्रष्ट तंत्र के आगे अधिकारी भी नतमस्तक हैं। देवकली ब्लॉक के सारे प्रधान भ्रष्ट हैं ऐसा भी नहीं है। ईमानदार प्रधानों की कमी नहीं है, लेकिन ढूंढना पड़ेगा। लेकिन जो भ्रष्ट हैं उनको पूरी ग्रामसभा जानती है। अधिकारियों के संज्ञान में भी बात होती है, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण मामला दबा दिया जाता है।
ग्राम प्रधानों से पूछने पर और नाम न छापने की शर्त पर सभी का कहना था कि “हम लोग अधिकारियों से परेशान हैं।” लेकिन चूहे-बिल्ली के गठजोड़ से हर कोई वाकिफ है और अधिकारियों के पूछने पर उनका कहना होता है कि “हम जांच करेंगे और दोषी पाए जाने पर दंडित किया जाएगा।” भ्रष्टाचार का यह खेल बहुत पहले से चल रहा है, सरकार किसी की भी हो, भ्रष्टाचार रुक नहीं सकता।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देवकली ब्लॉक को प्रोत्साहन राशि के रूप में ₹1 करोड़ निर्गत किया गया है। देवकली ब्लॉक में काम भी हुए हैं लेकिन मनरेगा की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जयदेश समाचार के इस सवाल पर खंड विकास अधिकारी जमालुद्दीन ने कहा कि “एक टीम बनाकर मनरेगा में होने वाले कामों की मॉनिटरिंग की जाएगी और गहन जांच भी कराई जाएगी।”
एक बुजुर्ग ग्रामीण ने जयदेश को बताया कि अधिकारी चाह लें तो पत्ता भी नहीं हिल सकता, भुगतान तो बहुत बड़ी चीज होती है। लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद देवकली ब्लॉक में इस मुद्दे पर हर किसी की अपनी-अपनी राय है। “ग्राम विकास आयुक्त ने जो आरोप लगाए हैं उनके आरोपों से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन खंड विकास अधिकारी जमालुद्दीन ने भी अपने पक्ष को रखने की पूरी कोशिश की है।” देखना ही होगा कि भ्रष्टाचार किस स्तर पर हुआ है।
