वाराणसी
दहेज हत्या में अभियुक्त अविनाश कुमार का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज
वाराणसी। सत्र न्यायालय, वाराणसी ने मुकदमा अपराध संख्या 75/2024 में अभियुक्त अविनाश कुमार का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। यह मामला धारा 498ए, 304बी भा.दं.सं. और 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत पंजीकृत है।
जानकारी के अनुसार, वादी की बहन प्रियंका की शादी तीन साल पहले अभियुक्त अविनाश कुमार से हुई थी। वादी के अनुसार, विवाह के बाद से ही प्रियंका को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। वादी ने यह भी बताया कि कुछ समय पहले ही उन्होंने अभियुक्तों की मांग पर 40,000 रुपये दिए थे। इसके बावजूद 4 मई 2024 की रात प्रियंका की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण “अस्फिक्सिया” (मृत्यु पूर्व लटकाए जाने) को बताया गया है।
अभियुक्त पक्ष की दलीलें
अभियुक्त अविनाश कुमार ने दावा किया कि वह निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। उसके अनुसार, घटना के दिन मृतका ने अपने पुत्र को डांटते हुए उसे मारा-पीटा था, जिसके चलते परिवार में कहासुनी हुई। इसके बाद प्रियंका ने भावावेश में आत्महत्या कर ली। अभियुक्त ने यह भी तर्क दिया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में किसी प्रकार की मारपीट के निशान नहीं मिले हैं।
अभियोजन पक्ष का तर्क
शासकीय अधिवक्ता ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि, अभियुक्त और उसके परिवार द्वारा लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप है। मृतका की बहन और वादी के बयान भी अभियोजन के पक्ष में हैं। मृतका की बहन ने अपने बयान में बताया कि प्रियंका को दहेज लाने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था और मौत से एक दिन पहले प्रियंका ने फोन पर अपनी परेशानी साझा की थी।
न्यायालय का निर्णय
सत्र न्यायाधीश संजीव पाण्डेय ने दोनों पक्षों की दलीलों और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कहा कि मृतका की मृत्यु सामान्य परिस्थितियों से हटकर हुई है और वह विवाह के सात वर्षों के भीतर हुई है। इन परिस्थितियों में अभियुक्त को जमानत देना उचित नहीं है।
न्यायालय ने कहा, मामले के समस्त तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है। वहीं इस मामले में सह-अभियुक्त मीना देवी और क्षमा का जमानत प्रार्थना पत्र भी पूर्व में खारिज हो चुका है।
