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वाराणसी

डिवाइडर बन रहे हादसों की वजह, रिफ्लेक्टर और संकेतक नदारद

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वाराणसी। शहर की मुख्य सड़कों पर बने डिवाइडर रात होते ही खतरा बन जाते हैं। अधिकतर स्थानों पर रिफ्लेक्टर और संकेतक न होने से वाहन चालक उन्हें देख नहीं पाते और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। बीते एक वर्ष में सिर्फ डिवाइडर से टकराने की वजह से 18 गंभीर हादसे दर्ज हुए हैं। वहीं नवंबर माह के आंकड़ों के अनुसार 110 से अधिक बाइक सवार घायल हुए।

तेज रफ्तार वाहन डिवाइडर को पहचान नहीं पाते और टक्कर के बाद चालक गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात 10 बजे के बाद पुलिस की मौजूदगी भी कम हो जाती है, जिससे स्थिति और खतरनाक हो जाती है।

रथयात्रा–महमूरगंज रोड पर हाल ही में एक कार डिवाइडर से टकराकर क्षतिग्रस्त हुई। इससे पहले भी इसी मार्ग पर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं तेलियाबाग–मलदहिया मार्ग पर कुछ महीने पहले एक पिकअप डिवाइडर में फंस गई थी। चालक घायल हुआ था।

इसके अलावा, रवींद्रपुरी–लंका मार्ग पर संकेतक न होने के कारण यहां अक्सर वाहन डिवाइडर से टकराते हैं। जबकि पांडेयपुर–चौकाघाट मार्ग पर डिवाइडर और कट के बीच चेतावनी संकेत न होने से लोगों की जान जोखिम में रहती है।

ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई जगहों पर लगे रिफ्लेक्टर टूट चुके या हट गए हैं। हादसा-प्रभावित क्षेत्रों में रिफ्लेक्टर और संकेतक पुनः लगाने का कार्य किया जा रहा है, जिसे जल्द पूरा कराया जाएगा।

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