गाजीपुर
जखनियां तहसील बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण समारोह में भड़के विधायक वेदीराम
सांसद अफजाल अंसारी ने संभाली कमान
गाजीपुर। जखनियां तहसीलबार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह गरमागर्म बहस और नाराजगी के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी, विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायाधिकारी जीसान मेहदी, तथा अतिथि के रूप में वर्तमान विधायक वेदीराम और पूर्व विधायक त्रिवेणी राम उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता एडवोकेट शिवभुवन पाठक ने की।
समारोह के दौरान सम्मान क्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जखनिया एसडीएम को पहले सम्मानित किया गया, उसके बाद सांसद अफजाल अंसारी और अन्य अतिथियों को, जबकि विधायक वेदीराम का नंबर सातवें स्थान पर रखा गया। जैसे ही उन्हें माला पहनाने की बारी आई, वे नाराज हो गए और माला वापस वरिष्ठ अधिवक्ता को पहना दी। उन्होंने कार्यक्रम संचालकों पर भड़कते हुए कहा कि वकील समाज शिक्षित वर्ग है और उन्हें प्रोटोकॉल का ज्ञान होना चाहिए।
विधायक वेदीराम की नाराजगी को शांत करने के लिए सांसद अफजाल अंसारी ने हस्तक्षेप किया और इसे “मानवीय भूल” बताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की। हालांकि, जब वेदीराम को दोबारा बोलने का मौका मिला, तो उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे बीए, एमए, एलएलबी हैं और जखनिया के वर्तमान विधायक भी हैं, इसलिए उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए था। हालांकि, सांसद अफजाल अंसारी के दोबारा समझाने पर वे शांत हुए और अधिवक्ताओं की मांगों पर सहमति जताई।
विधायक वेदीराम ने घोषणा की कि तहसील में वकीलों के लिए स्वच्छ पेयजल, बैठने के लिए हॉल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। इस दौरान सांसद अफजाल अंसारी ने भी वकीलों को सुझाव दिया कि वे सम्मान क्रम का ध्यान रखें और अपने क्षेत्र में जनता की समस्याओं पर अधिक फोकस करें। उन्होंने ग्राम न्यायालय में फौजदारी मामलों के निपटारे की सुविधा बढ़ाने पर जोर दिया और बार-बार हड़ताल करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया, जिससे आम जनता को परेशानी होती है।
कार्यक्रम के बाद सांसद अफजाल अंसारी ने जखनिया की एक मस्जिद में नमाज अदा की और मीडिया से बातचीत में कहा कि वे हमेशा गरीबों और समाज की भलाई के लिए संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने रुपये की गिरती कीमत और बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताई और कहा कि छोटी-मोटी परेशानियों से घबराने के बजाय वे इन्हें अपनी ताकत और ऊर्जा का स्रोत मानते हैं ताकि समाज की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सके।
