गाजीपुर
ग्राम सभा बघांव में चकबंदी और रुकबंदी प्रक्रिया प्रगति पर
बहरियाबाद (गाजीपुर)। ग्राम सभा बघांव की चकबंदी कराने के लिए रविंद्र यादव कोटेदार के बगीचे में चकबंदी एवं रुकबंदी कार्य करने के लिए सहायक चकबंदी अधिकारी, कानूनगो एवं लेखपाल ने किसानों की समस्याओं का समाधान किया और कार्य प्रगति पर है।
चकबंदी एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी गाँव या क्षेत्र के किसानों की इधर-उधर बिखरी हुई छोटी-छोटी ज़मीन के टुकड़ों (जोतों) को एक जगह इकट्ठा करके उनके कुल क्षेत्रफल के बराबर एक या दो बड़े भूखंड (चक) बनाकर उन्हें दे दिया जाता है। किसानों के बिखरे हुए खेतों को एक स्थान पर करने से कृषि कार्य करना आसान हो जाता है। बड़े चक बन जाने से किसान आधुनिक कृषि उपकरण और तकनीकों का बेहतर उपयोग कर पाते हैं, जिससे पैदावार बढ़ती है।
अलग-अलग खेतों तक जाने में लगने वाले समय और श्रम की बचत होती है। छोटे-छोटे खेतों के बीच की मेड़ें खत्म हो जाती हैं, जिससे कृषि योग्य भूमि बढ़ जाती है। चकबंदी के दौरान गाँव में सड़कों, नालियों और सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि का नियोजन भी किया जाता है।

“रुकबंदी” शब्द का प्रयोग आम तौर पर भूमि अभिलेखों या किसी प्रक्रिया पर रोक लगाने के संदर्भ में होता है। जब किसी गाँव या क्षेत्र में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू होती है, तो चकबंदी कानून के तहत उस क्षेत्र की ज़मीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, विभाजन और अन्य प्रकार के कानूनी परिवर्तन पर एक निश्चित अवधि के लिए रोक लगा दी जाती है। इस रोक को स्थानीय भाषा या प्रक्रिया में रुकबंदी कहा जा सकता है।
इस रोक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब तक चकबंदी की पूरी प्रक्रिया (ज़मीन का मूल्यांकन, नए चक का आवंटन, और अभिलेखों का अंतिम रूप देना) पूरी न हो जाए, तब तक ज़मीन के रिकॉर्ड में कोई नया बदलाव न हो, जिससे प्रक्रिया बाधित न हो और विवाद उत्पन्न न हों।
यह अवसर पर प्रधान प्रतिनिधि उदय भान पूर्व सैनिक ने चकबंदी प्रक्रिया के लिए काश्तकारों से आह्वान किया कि अपने-अपने चकों को दुरुस्त कराएं।
इस अवसर पर हीरालाल यादव, मुन्ना गिरी, राजेश यादव, गुड्डू यादव, अवधराज यादव, ईसा अंसारी, दीपचंद राम, अवधराज सिंह के अलावा अनेक काश्तकार उपस्थित रहे।
