गोरखपुर
कोटेदार पर एक यूनिट राशन काटने का आरोप, बीएलओ ने मतदाता सूची में दिखा दिया मृतक
राशन-मतदाता सूची में अनियमितता, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी आवाज
गोरखपुर। जनपद के सहजनवां तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस उस समय भावुक हो उठा, जब एक वृद्ध महिला अपनी पीड़ा लेकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के सामने गिड़गिड़ाती नजर आई। महिला ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली और निर्वाचन व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कोटेदार और बीएलओ पर मनमानी के आरोप लगाए।
तहसील क्षेत्र के शहरी वार्ड की निवासी कमलावती देवी ने समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनके राशन कार्ड पर निर्धारित मात्रा से एक यूनिट राशन कम दिया जा रहा है। कई बार कोटेदार से शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। वृद्ध महिला का आरोप है कि कोटेदार जानबूझकर राशन में कटौती करता है और विरोध करने पर धमकाने से भी नहीं चूकता।
इतना ही नहीं, कमलावती देवी ने एक और चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा उनका नाम मतदाता सूची में मृतक दर्शा दिया गया है, जबकि वह जीवित हैं और वर्षों से मतदान करती आ रही हैं। इस गलती के कारण उनका वोटिंग अधिकार भी प्रभावित हो गया है।
समाधान दिवस में मौजूद अधिकारियों और फरियादियों के बीच जब महिला अपनी बात कहते हुए भावुक हो गई तो माहौल भी गंभीर हो गया। महिला ने हाथ जोड़कर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई और कहा कि राशन और वोट, दोनों गरीब के जीवन के लिए जरूरी हैं, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने उसे हर मोर्चे पर परेशान कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी सहजनवां ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि राशन कटौती की जांच कर शीघ्र समस्या का समाधान कराया जाए। साथ ही मतदाता सूची में नाम को लेकर की गई गलती की भी जांच कर आवश्यक सुधार कराने के निर्देश दिए गए।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी ने कहा कि शिकायत गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तथा पीड़िता को पूरा न्याय दिलाया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक तंत्र की जमीनी हकीकत को उजागर करता है, जहां एक ओर योजनाएं गरीबों के लिए बनाई जाती हैं, वहीं दूसरी ओर लापरवाही और भ्रष्टाचार से वही गरीब सबसे अधिक पीड़ित होता
