वाराणसी
काशी में बदला मौसम का मिजाज, बीएचयू का एक्यूआई 170
धूल और धुएं के साथ बढ़ी कार्बन की मात्रा
बंगाल की खाड़ी में चक्रवातीय गतिविधियों के चलते उत्तर भारत में पिछले एक सप्ताह से बढ़ रहे तापमान और तेज धूप पर ब्रेक लगने की संभावना है।
पश्चिमी विक्षोभ का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है जिसके कारण सुबह से पछुआ हवाओं की गति में हल्की बढ़त देखी गई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे धूप थोड़ी नरम पड़ सकती है और ठंड में बढ़ोतरी हो सकती है।पश्चिमी विक्षोभ अगले दो दिनों तक पूर्वी क्षेत्र में सक्रिय रहेगा जिससे दिन और रात के तापमान में गिरावट आ सकती है।
वाराणसी के मौसम विज्ञानी प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विक्षोभ का मुख्य प्रभाव पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होगा, लेकिन इसका हल्का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी दिख सकता है। इससे तापमान में दो से तीन डिग्री तक की कमी आ सकती है।
सुबह हल्की धुंध के बाद धूप खिली, जिससे वाराणसी में अधिकतम तापमान औसत से 1.4 डिग्री अधिक 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13.1 डिग्री दर्ज किया गया। हालांकि ग्रामीण इलाकों में तापमान औसत से थोड़ा कम रहा।
ठंड के साथ-साथ शहर की हवा की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। वाराणसी के विभिन्न क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 101 से 170 के बीच दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। बीएचयू के प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार धूल और कार्बन के बढ़े कणों के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। सुबह-शाम के समय तापमान में गिरावट से यह समस्या और बढ़ रही है।
प्रदूषण का मुख्य कारण शहर में चल रहे निर्माण कार्यों में मानकों का पालन न होना, धूल का उड़ना और शादी-ब्याह के मौसम में वाहनों की बढ़ती संख्या बताई जा रही है। जाम की समस्या ने भी हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ा दी है
