वाराणसी
कफ सीरप मामले में 28 कारोबारियों पर दर्ज होगा मुकदमा
26 फर्मों की तीन साल की खरीद-बिक्री का होगा सत्यापन
वाराणसी में कफ सीरप की सौ करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में एसआइटी की जांच आगे बढ़ गई है। मामले में शामिल 28 कारोबारियों पर अब आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जांच में नकली और मिलावटी कफ सीरप की बड़े पैमाने पर अवैध बिक्री का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि कई फर्में लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन करते हुए प्रतिबंधित और मिलावटी दवाओं की सप्लाई कर रही थीं।
ड्रग विभाग की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने लाइसेंस उल्लंघन का केस दर्ज कर लिया है। एसआइटी अध्यक्ष एवं एडीसीपी काशी जोन सरवणन टी ने बताया कि गहन जांच के लिए एसओजी और साइबर टीम की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि एसआइटी में तीन सदस्य जरूर हैं, लेकिन पूरे नेटवर्क को समझने और जोड़ने के लिए कई टीमें तैनात की गई हैं।
एसआइटी ने पुलिस और ड्रग विभाग को निर्देश दिया है कि आरोपित 26 फर्मों की पिछले तीन वर्षों की दवा खरीद-बिक्री का सत्यापन किया जाए, ताकि पूरे तार जोड़कर मुकदमे की मजबूत नींव रखी जा सके।
मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के घर पर ताला लगा मिला है। उसके नए-पुराने सभी मोबाइल नंबरों की निगरानी की जा रही है। पुलिस उसके करीबी रिश्तेदारों और संपर्क में आने वालों पर नजर रख रही है।
रोहनिया क्षेत्र में 62 प्लास्टिक बोरियों में बरामद नशीला फेंसिडिल और 502 पेटी कफ सीरप को पुलिस ने नए कानून के तहत सीधे अदालत में प्रस्तुत किया। इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि काशीपुर निवासी महेश सिंह और शुभम जायसवाल की तलाश जारी है।
एसआइटी की अगली बैठक 25 नवंबर को बुलाई गई है, जिसमें अब तक की कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। बैठक में ड्रग विभाग की टीम भी मौजूद रहेगी।
कफ सीरप तस्करी में करोड़ों रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आने के बाद ईडी भी सक्रिय हो गई है। शुक्रवार को विभिन्न एजेंसियों ने शुभम जायसवाल के अतीत और वर्तमान गतिविधियों की जानकारी जुटाई। उसके फेसबुक और अन्य इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स की निगरानी कर संदिग्ध मैसेज और संपर्कों को जांच के दायरे में लाया जा रहा है।
