वाराणसी
एचआईवी से डरे नहीं, उपचार करायें : डॉ. संदीप चौधरी
वाराणसी। विश्व एड्स दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय, पांडेयपुर से एक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली का उद्देश्य एचआईवी/एड्स के प्रति लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करना और इस गंभीर बीमारी के प्रति सही जानकारी फैलाना था। इस वर्ष विश्व एड्स दिवस की थीम है: “Take the rights path, My health, My right”।
एचआईवी से डरे नहीं, उपचार करायें : डॉ. संदीप चौधरी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संदीप चौधरी ने कहा, “एचआईवी/एड्स कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है। यह भ्रांति कि एड्स के मरीज के संपर्क में आने से संक्रमण फैलता है, पूरी तरह गलत है। इस रैली के माध्यम से हमने लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है ताकि इस बीमारी को रोका जा सके। जागरूकता ही बचाव है।”

स्कूल-कॉलेजों में हुई जागरूकता गतिविधियां
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष राय ने जानकारी दी कि राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, रामनगर में एसएसके टीम द्वारा छात्राओं को एचआईवी/एड्स, एसटीआई और टीबी जैसी बीमारियों के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं, शिक्षकों और प्रिंसिपल ने भाग लिया।
प्रगति पथ फाउंडेशन की कार्यशाला
सुधाकर महिला विधि महाविद्यालय, खजुरी, पांडेयपुर में प्रगति पथ फाउंडेशन द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत “एचआईवी/एड्स नियंत्रण एवं रोकथाम अधिनियम-2017” पर चर्चा की गई। विशेष अतिथि सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रीति अग्रवाल ने कहा, “एचआईवी/एड्स पीड़ित व्यक्ति भी इंसान हैं। इस अधिनियम का उद्देश्य उनके साथ भेदभाव को रोकना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।”

डॉ. पीयूष राय ने कहा, “गलत जानकारी से बचने के लिए लोगों को विषय विशेषज्ञों या नाको (NACO) की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लेनी चाहिए। यह कानून एचआईवी/एड्स पीड़ितों को समाज में समान अधिकार दिलाने का माध्यम है।”
10,000 प्रवासियों तक पहुंचने का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहयोग से प्रगति पथ फाउंडेशन वाराणसी में लक्षित हस्तक्षेप परियोजना के तहत 10,000 प्रवासियों को स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता प्रदान कर रहा है।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एचआईवी/एड्स जैसी गंभीर बीमारी के प्रति सही जानकारी और जागरूकता ही इसे नियंत्रित करने का सबसे बड़ा हथियार है।
