वाराणसी
अस्पतालों और क्लिनिक की लाइसेंस फीस में भारी वृद्धि
वाराणसी। नगर निगम ने शहर में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथालॉजी और क्लिनिक की लाइसेंस फीस में दो से तीन गुना तक वृद्धि कर दी है। नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी होंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अब 20 बेड तक वाले नर्सिंग होम को 12,000 रुपये लाइसेंस फीस चुकानी होगी, जो पहले 4,000 रुपये थी। 21 से 30 बेड वाले नर्सिंग होम के लिए यह 25,000 रुपये, 31 से 50 बेड वालों के लिए 35,000 रुपये और 51 से अधिक बेड वाले नर्सिंग होम के लिए 50,000 रुपये निर्धारित की गई है।

प्रसूति गृह संचालन के लिए भी फीस में तीन गुना बढ़ोतरी की गई है। 1 से 20 बेड वाले प्रसूति गृह को 20,000 रुपये, 21 से 30 बेड के लिए 30,000 रुपये, 31 से 50 बेड वालों के लिए 50,000 रुपये और 51 से अधिक बेड वाले प्रसूति गृह के लिए 60,000 रुपये चुकाने होंगे।

निजी अस्पतालों को भी अब बेड के आधार पर फीस देनी होगी। 1 से 20 बेड वाले अस्पताल को 25,000 रुपये (पहले 10,000 रुपये), 21 से 30 बेड के लिए 35,000 रुपये, 31 से 50 बेड के लिए 50,000 रुपये और 51 से अधिक बेड वाले अस्पतालों को 70,000 रुपये देने होंगे।
पैथालॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर पर भी टैक्स बढ़ा दिया गया है। पैथालॉजी सेंटर को 5,000 रुपये, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड क्लिनिक को 16,000 रुपये (पहले 8,000 रुपये), सिटी स्कैन और एमआरआई सेंटर को 30,000 रुपये तथा फिजियोथैरेपी, योगा और एक्यूप्रेशर सेंटर को 6,000 रुपये का शुल्क देना होगा।

निजी क्लिनिक और डेंटल क्लिनिक पर भी असर पड़ा है। अब निजी क्लिनिक को 10,000 रुपये (पहले 6,000 रुपये) और डेंटल क्लिनिक को 12,000 रुपये (पहले 8,000 रुपये) चुकाने होंगे।
वाराणसी में 6,000 से अधिक निजी अस्पताल, क्लिनिक और नर्सिंग होम संचालित हैं। नगर निगम के इस फैसले से संचालकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि टैक्स में इतनी अधिक वृद्धि से स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो जाएंगी, जिसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा। दूसरी ओर, नगर निगम का तर्क है कि इस निर्णय से शहर में स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर नियमन होगा और सुविधा विस्तार में मदद मिलेगी।
