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मिर्ज़ापुर

अगर किसान जियेगा, तो भारत जियेगा

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अन्नदाता की बदहाली पर सवाल उठाती रिपोर्ट

मिर्जापुर के मड़िहान क्षेत्र में किसानों की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। अन्नदाता, जो देश का पेट भरता है, आज खुद भूख, गरीबी और कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।

बढ़ती कृषि लागत और कम आमदनी बनी समस्या

क्षेत्रीय किसानों की दुर्दशा का मुख्य कारण कम उपजाऊ कृषि भूमि, महंगे कृषि उपकरण, और लगातार बढ़ती कृषि लागत है। किसान अपनी फसल की लागत निकालने में भी असमर्थ हैं, जिससे कर्ज चुकाना उनके लिए असंभव हो गया है। कृषि क्षेत्र में आवश्यक उपकरणों और रसायनों की महंगाई के चलते किसान आधे पेट खाकर गुजारा करने को मजबूर हैं। खेती से इतना मुनाफा नहीं निकलता कि वे अपना कर्ज चुका सकें।

कर्ज में डूबे किसानों की बदहाली

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किसानों पर बैंकों का कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। वसूली के लिए बैंक और प्रशासन सख्त रवैया अपना रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि किसानों को उनके खेतों और खलिहानों से पकड़कर जेल भेजा जा रहा है। किसान विरोध करने की स्थिति में भी नहीं हैं और चुपचाप अपनी सजा काटने को मजबूर हैं।

देश की अर्थव्यवस्था में खेती की भूमिका

भारत की लगभग दो तिहाई आबादी की आजीविका खेती पर निर्भर है। खेती न केवल ग्रामीण क्षेत्रों का जीवनयापन का साधन है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। अगर किसान खुशहाल रहेगा, तो भारत भी खुशहाल रहेगा।

कर्ज माफी और सरकारी योजनाओं की आवश्यकता

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आज जब बड़ी परियोजनाओं और आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, किसानों की बदहाली पर सवाल उठते हैं। उदाहरण के तौर पर, महाकुंभ मेले के लिए 5060 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। ऐसे आयोजनों की तुलना में किसानों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना अधिक आवश्यक है।

कर्ज माफी और किसानों को बेहतर संसाधन मुहैया कराने की सख्त जरूरत है। किसानों की संपन्नता सुनिश्चित करने से न केवल उनकी हालत सुधरेगी, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

नेशनल न्यूट्रिशन मॉनिटरिंग ब्यूरो के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 35% लोग कुपोषण का शिकार हैं। 42% ग्रामीण बच्चों का वजन सामान्य से कम है। इनमें से अधिकांश गरीब और खेतिहर परिवारों से आते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि किसानों और उनके परिवारों को बुनियादी पोषण तक नहीं मिल पा रहा है।

सरकार को ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो किसानों की आय बढ़ाने और उनकी स्थिति में सुधार लाने में मदद करें। अन्नदाता का जीवन बेहतर बनाकर ही देश को समृद्धि की ओर ले जाया जा सकता है।

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