वाराणसी
UP College : हत्यारोपी मंजीत का पोर्टल ब्लॉक, निष्कासन की प्रक्रिया तेज
वाराणसी। उदय प्रताप कॉलेज (यूपी कॉलेज) परिसर में 19 मार्च को बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या के मामले में आरोपी छात्र मंजीत सिंह चौहान के खिलाफ कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके मंजीत का ऑनलाइन पोर्टल कॉलेज प्रबंधन ने ब्लॉक कर दिया है, जिससे अब वह कॉलेज की वेबसाइट से किसी भी प्रकार के शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त नहीं कर सकेगा। साथ ही उसके निष्कासन की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है, जिसे दो से तीन दिनों में पूर्ण किए जाने की संभावना है।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार पोर्टल ब्लॉक होने के बाद अब आरोपी या उसके सहयोगी कॉलेज की वेबसाइट से रिजल्ट, मार्कशीट, प्रवेश पत्र, परीक्षा फॉर्म या एनओसी जैसे किसी भी दस्तावेज तक पहुंच नहीं बना पाएंगे। इधर, घटना के दस दिन बाद कॉलेज को पुनः खोला गया, जहां पहले दिन केवल पीजी कक्षाओं का संचालन हुआ, जबकि यूजी की पढ़ाई पूर्ववत ऑनलाइन जारी रही।
एमए, एमकॉम, एमएससी, एमएससी (एग्रीकल्चर), बीएड और बी.लिब पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑफलाइन संचालित की गईं। परिसर में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं को आईकार्ड दिखाना अनिवार्य किया गया और बिना वैध पहचान पत्र के किसी को प्रवेश नहीं दिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे समय पुलिस बल तैनात रहा।
घटना के बाद विज्ञान संकाय में आम छात्रों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी और केवल संबंधित छात्रों को ही अनुमति दी गई। इसके बावजूद छात्र घटनास्थल को लेकर चर्चा करते रहे। गोली चलने और आरोपी के छत से कूदकर भागने की बातें सामने आती रहीं, वहीं कुछ छात्र मौके के वीडियो बनाते भी देखे गए। कक्षाओं में लगभग 70 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। मामले में आरोपी मंजीत फिलहाल जेल में बंद है और पुलिस उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

घटना के क्रम में बताया गया कि बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह 20 दिन बाद 20 मार्च को कॉलेज पहुंचे थे। सुबह करीब 11 बजे बीए द्वितीय वर्ष के छात्र मंजीत सिंह चौहान ने प्रिंसिपल और अन्य छात्रों के सामने उन्हें गोली मार दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पिस्टल कूड़े में फेंककर फरार हो गया। घटना का वीडियो भी एक छात्र ने रिकॉर्ड किया।
भागने के दौरान पकड़े जाने के डर से आरोपी ने लगभग 12 फीट ऊंची छत से छलांग लगा दी, जिससे उसका पैर टूट गया। इसके बावजूद वह एयरपोर्ट रोड की ओर भागा और ई-रिक्शा से गिलट बाजार चौराहे पहुंचकर मोबाइल फोन बंद कर लिया। बाद में उसने सुनसान स्थान पर इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन चोट के कारण शहर से बाहर नहीं जा सका।
घटना के बाद आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ की और कुर्सियां तोड़ीं। करीब चार घंटे बाद पुलिस ने हालात नियंत्रित करते हुए कॉलेज गेट खुलवाया और सुरक्षा घेरा बनाकर छात्रों व शिक्षकों को बाहर निकाला। पथराव में तीन प्रोफेसर घायल हुए, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। मृतक छात्र के माता-पिता अपने इकलौते पुत्र का शव देखकर बेसुध हो गए। पुलिस ने 20 मार्च को आरोपी को गिरफ्तार कर 21 मार्च को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। उसके एक सहयोगी की तलाश जारी है।
सूर्य प्रताप सिंह (21) गाजीपुर जनपद के निवासी थे। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने नौवीं से यूपी कॉलेज में पढ़ाई शुरू की और इंटरमीडिएट परीक्षा पीसीएम से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने बीएससी गणित में प्रवेश लिया था और आगे एमएससी कर शोध कार्य करने की योजना बना रहे थे। सहपाठियों के अनुसार वह मिलनसार और पढ़ाई के प्रति गंभीर छात्र थे।
मृतक के पिता ऋषि देव सिंह लखनऊ में ट्रैवल एजेंसी में चालक हैं, जबकि मां किरण सिंह एक स्कूल में सहायिका हैं। परिवार में दो बहनें हैं, जिनमें एक का विवाह हो चुका है। बताया गया कि सूर्य प्रताप को घटना से लगभग 20 दिन पहले चेचक हो गई थी, जिसके कारण वह कॉलेज नहीं आ रहे थे और स्वस्थ होने के बाद उसी दिन कॉलेज पहुंचे थे।
आरोपी मंजीत सिंह चौहान बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है और वाराणसी के चांदमारी क्षेत्र का निवासी है। उसके खिलाफ पहले भी शिवपुर थाने में धारा 323 के तहत मामला दर्ज है। उसके सहयोगी अनुज पर भी कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। मंजीत की छवि क्षेत्र में विवादित रही है और वह सोशल मीडिया पर स्वयं को माफिया बताता है। बताया गया कि वह ‘1818 गैंग’ नाम से समूह संचालित करता है और स्थानीय थानों में भी चर्चित रहा है।
