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शिक्षा

BHU में बायो स्टेटिस्टिक्स सेंटर बनेगा विभाग, शुरू होंगे तीन नए पीजी कोर्स

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वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से तीन नए परास्नातक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की तैयारी है। इन पाठ्यक्रमों की सेमेस्टर फीस 6720 रुपये निर्धारित की गई है। साथ ही विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ बायो स्टेटिस्टिक्स को विभाग का दर्जा देने का प्रस्ताव भी आगामी एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। इस संबंध में एकेडमिक काउंसिल पहले ही अपनी सहमति दे चुकी है।

अब तक सेंटर ऑफ बायो स्टेटिस्टिक्स का संचालन कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अधीन किया जा रहा था। स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के अध्ययन के उद्देश्य से वर्ष 1999 में एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने बायो स्टेटिस्टिक्स डिवीजन की अनुमति दी थी, जिसे वर्ष 2018 में सेंटर का रूप दिया गया। इसके बाद वर्ष 2021 में इस विषय में एमएससी पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई थी।

नए सत्र से क्लीनिकल साइकोलॉजी, साइकेट्रिक सोशल वर्क (मेंटल हेल्थ) और साइकाट्री नर्सिंग में परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक कोर्स में 12-12 सीटें निर्धारित की गई हैं और प्रवेश प्रक्रिया सीयूईटी पीजी के माध्यम से पूरी की जाएगी। अब तक इन विषयों में केवल डिप्लोमा और विशेष पाठ्यक्रम संचालित होते थे, लेकिन पहली बार इनकी नियमित परास्नातक डिग्री दी जाएगी।

इन पाठ्यक्रमों के लिए सामान्य सीटों की सेमेस्टर फीस 6720 रुपये तय की गई है, जबकि पेड सीटों के लिए 46720 रुपये शुल्क निर्धारित है। सीयूईटी पीजी परीक्षा आयोजित हो चुकी है और एक-दो दिन में इसकी उत्तर कुंजी जारी होने की संभावना है। नए विषय होने के कारण अभ्यर्थियों में कटऑफ को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। इन कोर्सों में प्रवेश के लिए बीएससी साइकोलॉजी और बीए सोशल वर्क में स्नातक अभ्यर्थियों को पात्र माना गया है।

इसी क्रम में मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र और अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के पूर्व निदेशक प्रो. राजीव संगल मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा : अवसर और चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।

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उन्होंने बताया कि भारत सरकार के ‘भाषिणी’ एप के निर्माण की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जिसमें विभिन्न अकादमिक संस्थानों के 70 शोध समूहों ने मिलकर कार्य किया। उन्होंने इसके उपयोग में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर प्रो. संजय कुमार सहित अन्य शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में प्रो. कमलशील, प्रो. आरके मंडल, प्रो. आरके मिश्रा, प्रो. प्रभाकर सिंह और प्रो. अर्चना कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।

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