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वाराणसी

अपने धर्म और संस्कृति पर भरोसा रखना सुभाष ने सिखाया –इन्द्रेश कुमार

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वाराणसी। अंग्रेजी हुकूमत में आईसीएस की नौकरी को देश के लिए त्याग देने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1929 को लाहौर में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि चरित्र निर्माण और मनुष्यता के विकास के लिए राजनीति में हिस्सेदारी जरूरी है। विश्वविद्यालयों का काम किताबी कीड़े, गोल्डमेडलिस्ट और ऑफिस के लिए क्लर्क पैदा करना नहीं होता बल्कि चरित्रवान व्यक्ति बनाना होता है जो जीवन के विभिन्न हिस्सों में अपने देश के लिए महानता हासिल करके महान बन सकें।

नेताजी सुभाष का उपर्युक्त कथन आज भी प्रासंगिक है और युवा दोराहे पर खड़े हैं। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के 126वें जन्मदिवस के अवसर पर विशाल भारत संस्थान द्वारा आयोजित सुभाष महोत्सव के दूसरे दिन भारतीय युवा अधिवेशन में देशभर के विभिन्न विद्यालय और विश्वविद्यालयों से 600 से अधिक युवाओं ने हिस्सेदारी कर देश और समाज के लिए चिंतन किया।

भारतीय युवा अधिवेशन के मुख्य अतिथि आरएसएस के केन्द्रीय नेता इन्द्रेश कुमार ने सुभाष मन्दिर में मत्था टेका और दीपोज्वलन कर अधिवेधन की शुरुवात की। विशाल भारत संस्थान के बच्चों ने कदम-कदम बढ़ाए जा मार्च गीत के माध्यम से नेताजी सुभाष को याद किया।

भारतीय युवा अधिवेशन में 11 सूत्री प्रस्ताव पारित किए गए, जिसका युवाओं ने दोनों हाथों को खड़ा करके समर्थन किया। इन्द्रेश कुमार ने युवाओं को शपथ दिलाई कि–

  1. भारतीय संस्कृति को अपमानित करने एवं मजाक उड़ाने वाली फिल्मों व सीरियल का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
  2. पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर को भारत के 29 वें राज्य के रूप में घोषित करने की मांग करते हैं। खण्डित भारत को अखण्ड भारत बनायेंगे।
  3. लव जिहाद के चक्कर मे फंसी युवतियों की मदद करेंगे एवं इसके विरुद्ध व्यापक अभियान चलाएंगे।
  4. अपने जीवन में जातिवादी, मजहबवादी, स्वार्थी, दंगाई नेताओं को नहीं बल्कि राष्ट्रवादियों को अपना नेता मानेंगे।
  5. भारत, भारतीयता, भारतीय मातृ भाषाओं और भारतीय परिधान को प्रोत्साहन देंगे। हिन्दी में हस्ताक्षर करेंगे।
  6. चीन और पाकिस्तान के भारत विरोधी प्रोपोगंडा का जबाव देंगे।
  7. देश विरोधी नेताओं, देश विरोधी शक्तियों, देश के खिलाफ बोलने वालों को बेनकाब करेंगे।
  8. छुआछूत मिटायेंगे, भारत को एक बनायेंगे।
  9. नशा नहीं-पढ़ाई करेंगे। नौकरी, व्यवसाय, खेती और विकास करेंगे परन्तु देश के लिये।
  10. पेड़ लगायेंगे, पानी बचायेंगे, सफाई रखेंगे, प्लास्टिक से दूर रहेंगे, पर्यावरण मित्र कहलायेंगे।
  11. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बताये मार्ग का अनुशरण कर देश सेवा के लिये जीवन अर्पित कर देंगे। अधिवेशन के मुख्य अतिथि इन्द्रेश कुमार ने कहा कि भारत को श्रेष्ठ बनाने के लिये युवा शक्ति की आवश्यकता है। अपने धर्म और संस्कृति पर भरोसा रखना सुभाष ने सिखाया था। सुभाष चन्द्र बोस भारतीय युवा शक्ति के प्रतीक हैं। उनके मार्ग पर चलने से अखण्ड भारत बनाया जा सकता है। तकनीकी की दुनियां में युवा सतर्क और सावधान रहें। प्रेम राधा कृष्ण की तरह हो तो सबको स्वीकार है। लेकिन प्रेम में वासना हो, नाटक हो और नाम और धर्म छुपाकर के प्रेम किया जाये तो इसका परिणाम बेटियों का कत्ल ही है। कोई भी लव के खिलाफ नहीं है, लेकिन लव जिहाद को कभी स्वीकार नहीं किया जायेगा। सुभाष का राष्ट्रवाद ही असली राष्ट्रवाद है। उसी रास्ते पर चलकर जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।

इन्द्रेश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जल्द ही भारत का हिस्सा होगा। अगर पाकिस्तानी कहते हैं कि हमें कश्मीर की बहुत याद आती है तो हमें भी लाहौर और करांची की बहुत याद आती है। हम किसी भी भारत भूमि को अलग नहीं होने देंगे। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सपनों का भारत जल्द ही बनेगा। अपने जीवन में जातिवादी, मजहबवादी, स्वार्थी, दंगाई नेताओं को नहीं बल्कि राष्ट्रवादियों को अपना नेता मानेंगे।

विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि युवा इस देश की तस्वीर को बदलने की ताकत रखते हैं। युवा कैरियर विथ नेशन एंड कैरियर विथ इमोशन के सूत्र को अपनाएं। देश और संस्कार से युवाओं को दूर करने की गहरी साजिश करके देश के लोगों को आपस में लड़ाने का माहौल तैयार किया जा रहा है। नफरत का माहौल बनाकर सिर्फ अपने हितों के लिए युवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब युवा अपने देश और अपने संस्कृति के लिए सिर्फ चिंतित ही नहीं बल्कि मुखर हो चुका है। तभी ऐसी फिल्मों को फ्लॉप होना पड़ रहा है जो भारतीय संस्कृति पर कुठारघात कर रहे हैं।

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अधिवेशन के विशिष्ट अतिथि उ०प्र० पुलिस के अधिकारी विपिन राय ने कहा कि यह राष्ट्र हमारी जन्मभूमि है, उसकी देखभाल करना और सुरक्षा करना ही हमारी पूजा है। आप विद्यार्थी हैं और अपने देश से वैसा ही प्रेम करिये जैसा राष्ट्रदेवता सुभाष चन्द्र बोस ने भारत माँ से किया। सबसे प्रिय अपने प्राण होते हैं, लेकिन ये प्राण भी कर्तव्य से बड़ा नहीं होता है। कर्तव्य के लिये प्राणों की आहूति देनी पड़े निश्चित देंगे, ये सुभाष चन्द्र बोस सिखा गये।

विशिष्ट अतिथि अयोध्या के साकेत भूषण श्रीराम पीठ के पीठाधीश्वर महंत शम्भू देवाचार्य ने कहा कि अपने देश के लिये संकल्पित होकर अपने पद, प्रतिष्ठा, सम्मान, निजी स्वार्थ, भौतिक सुख सुविधाओं और उपभोगतावादी सोच की आहूति देनी पड़ेगी तभी देश के कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ सकेंगे।

अध्यक्षता करते हुए डा० घनश्याम सिंह पी०जी० कॉलेज के प्रबंधक नागेश्वर सिंह ने कहा कि अपने लिये तो सभी करते हैं लेकिन उससे पहले हमें अपने देश के लिये समर्पित होना चाहिये। आपकी समर्पित सोच आपका भी विकास होगा और देश का भी विकास होगा।

अधिवेशन में बाबू तूफानी सिंह पीजी कॉलेज के प्रबंधक अजय कुमार सिंह, आदित्य नारायण इंटर कॉलेज चकिया के प्रवक्ता डा० मुकेश श्रीवास्तव एवं जय प्रताप सिंह ने भी विचार व्यक्त किया।

अधिवेशन का संचालन अर्चना भारतवंशी ने किया। अधिवेशन में प्रमुख रूप से डा० कविन्द्र नारायण, डा० निरंजन श्रीवास्तव, डा० मुकेश श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश, अनिल पाण्डेय, नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डा० मृदुला जायसवाल, खुशी भारतवंशी, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, दक्षिता भारतवंशी, डी०एन० सिंह, मो० अजहरूद्दीन, धर्मेन्द्र नारायण, जय प्रताप सिंह, सूरज चौधरी, राजकुमार राजू, ओ०पी० सिंह, ओम प्रकाश पाण्डेय, राजेश कन्नौजिया, देवेन्द्र पाण्डेय, कन्हैया पाण्डेय, ओ०पी० चौधरी, मुकेश प्रताप सिंह, धनंजय यादव, दीपक, सुधांशु सिंह, मयंक श्रीवास्तव आदि सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया।

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