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वाराणसी

दरोगा भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर एफआईआर की मांग

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में “पंडित” शब्द के कथित अपमानजनक प्रयोग को लेकर रविवार को समाज के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल थाना कैंट, वाराणसी पहुंचा और मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग उठाई। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने थाना अध्यक्ष को विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया गया कि 14 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग के महत्वपूर्ण पद दरोगा (Sub-Inspector) की भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के हिंदी प्रश्नपत्र में “अवसरवादी” शब्द के विकल्पों में “पंडित” शब्द शामिल किया गया था। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि भारतीय समाज में “पंडित” शब्द परंपरागत रूप से विद्वानों और ब्राह्मण समाज के लिए सम्मानसूचक संबोधन के रूप में प्रयुक्त होता है, जो ज्ञान, विद्वता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे सम्मानित शब्द को नकारात्मक अर्थ वाले विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाना समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं और सामाजिक प्रतिष्ठा को आहत करने वाला है।

प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश की महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में शामिल है, जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भाग लेते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत सावधानी के साथ कई स्तरों पर पूरी की जाती है। सामान्यतः विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रश्न तैयार किए जाते हैं, इसके बाद मॉडरेशन समिति द्वारा उनका परीक्षण किया जाता है और अंत में संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति के बाद ही प्रश्नपत्र को अंतिम रूप दिया जाता है। इसके बावजूद इस प्रकार का प्रश्न शामिल होना गंभीर लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण कृत्य की आशंका को दर्शाता है।

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञों, मॉडरेशन समिति के सदस्यों तथा परीक्षा आयोजन से जुड़ी एजेंसी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विधिसम्मत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाया गया तो समाज के लोग उच्च पुलिस अधिकारियों और सक्षम न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।

थाना कैंट पहुंचकर ज्ञापन सौंपने वालों में शशांक शेखर त्रिपाठी, राजेश कुमार त्रिवेदी, संतोषी शुक्ला, अरुण कुमार मिश्रा, आशुतोष शुक्ला, नीरज चौबे (सोनू), उपेंद्र निगम, शिवेंद्र कुमार दुबे, मनोज कुमार तिवारी, करण सिंह, राज शेखर त्रिपाठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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