गाजीपुर
पत्रकारिता का अर्थ एवं महत्व: लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका
लोकतंत्र की सफलता केवल संविधान और चुनावों से नहीं होती, बल्कि उस सजग और सक्रिय जनचेतना से होती है जो शासन को जवाबदेह बनाए रखती है। इस जनचेतना के निर्माण में पत्रकारिता की केंद्रीय भूमिका है। पत्रकारिता केवल समाचारों का संकलन और प्रसारण भर नहीं, बल्कि समाज के विचार, संवेदना और संघर्षों का दर्पण है।
‘पत्रकारिता’ शब्द का आशय है—समाज में घटित घटनाओं, विचारों और मुद्दों को सत्य, निष्पक्ष और संतुलित रूप में जनता तक पहुँचाना। पत्रकार वह है जो सत्ता और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है। प्रख्यात चिंतक महात्मा गांधी ने कहा था कि “पत्रकारिता का उद्देश्य सेवा है।” यह सेवा सत्य की खोज, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ और जनहित की रक्षा के माध्यम से होती है।
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ मीडिया को लोकतंत्र का “चौथा स्तंभ” माना जाता है। यह उपमा यूँ ही नहीं दी गई है। मीडिया शासन की नीतियों की समीक्षा करता है, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करता है तथा जनता की समस्याओं को मंच प्रदान करता है। जब मीडिया स्वतंत्र और निर्भीक होता है, तब लोकतंत्र सशक्त होता है। यदि मीडिया पर दबाव या नियंत्रण हो, तो लोकतांत्रिक मूल्यों का क्षरण शुरू हो जाता है।
मीडिया को समाज,सत्ता, एवं शासन के प्रति अपनी भूमिकाओं का निर्वहन करने के लिए नागरिकों को सही, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी देने के साथ साथ सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श को दिशा देना, शासन के कार्यों की समीक्षा कर उसे जवाबदेह बनाना एवं वंचित और शोषित वर्गों की आवाज़ को मंच देने का स्वरुप भी देना चाहिए।
प्रसिद्ध समाजशास्त्री डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने लोकतंत्र को केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि “जीवन पद्धति” बताया था। इस जीवन पद्धति को जीवंत बनाए रखने में स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आज मीडिया के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं—कॉरपोरेट दबाव, फेक न्यूज़, टीआरपी की प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया की अराजकता। डिजिटल युग में सूचना की गति तेज हुई है, परंतु सत्यापन की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। ऐसे समय में पत्रकारिता का दायित्व है कि वह सनसनी से ऊपर उठकर तथ्य और नैतिकता को प्राथमिकता दे।
पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है। यह जनता की आवाज़ को शासन तक और शासन की नीतियों को जनता तक पहुँचाने का माध्यम है। जब पत्रकार निष्पक्षता, साहस और सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करते हैं, तब लोकतंत्र मजबूत होता है।
इसलिए आज आवश्यकता है कि पत्रकारिता अपने मूल्यों—सत्य, स्वतंत्रता और जनसेवा को केंद्र में रखकर आगे बढ़े। एक जागरूक और उत्तरदायी मीडिया ही सशक्त लोकतंत्र की गारंटी है।
