चन्दौली
देवभूमि महाकाल मंदिर सामाजिक समरसता का बना प्रतीक
बबुरी (चंदौली) जयदेश। क्षेत्र के चंदाइत गांव में स्थित देवभूमि महाकाल मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है। लगभग दो सौ वर्ष पुराने इस प्राचीन शिव मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर में भक्तों की चहल-पहल बनी रहती है।
मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव की विशेष कृपा भक्तों पर बनी रहती है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह मंदिर अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है और वर्षों से यहां निरंतर पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष मंदिर समिति एवं ग्रामीणों के सहयोग से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।
सावन मास में देवभूमि महाकाल मंदिर का स्वरूप और भी दिव्य हो जाता है। भक्तों का रेला मंदिर की ओर उमड़ पड़ता है। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। श्रद्धालु जलाभिषेक कर मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर ग्रामवासी पूरी मुस्तैदी से लगे रहते हैं, ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
देवभूमि महाकाल मंदिर क्षेत्र में सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन चुका है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना को बल मिलता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है। यही कारण है कि यह मंदिर वर्षों से आस्था, विश्वास और भक्ति का अनुपम केंद्र बना हुआ।
