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गोरखपुर

आयुर्वेदिक दवाओं का बैक्टीरिया-वायरस और मानव जीन पर होगा शोध

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आयुष विश्वविद्यालय में 5 करोड़ से बनेगा समन्वित अनुसंधान केंद्र

गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेदिक दवाओं के वैज्ञानिक परीक्षण और अनुसंधान को नई दिशा देने की तैयारी है। यहां करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से समन्वित अनुसंधान केंद्र (इंटीग्रेटेड रिसर्च सेंटर) की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र में आयुर्वेदिक औषधियों के बैक्टीरिया, वायरस और मानव जीन (जीनोम) पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अब तक आयुर्वेदिक दवाओं की प्रभावशीलता अधिकतर पारंपरिक अनुभवों और ग्रंथों पर आधारित रही है। नए अनुसंधान केंद्र के जरिए इन दवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटी पर परखा जाएगा। इसके तहत यह देखा जाएगा कि आयुर्वेदिक औषधियां किस प्रकार बैक्टीरिया और वायरस पर असर डालती हैं तथा मानव शरीर के जीन स्तर पर उनका क्या प्रभाव होता है।

अनुसंधान केंद्र में आधुनिक लैब, बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े उपकरण और प्रशिक्षित वैज्ञानिक तैनात किए जाएंगे। यहां आयुर्वेद, एलोपैथी और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से शोध किया जाएगा, जिससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को वैज्ञानिक प्रमाण मिल सके। इसका लाभ न केवल शोधार्थियों और चिकित्सकों को मिलेगा, बल्कि आम मरीजों के लिए भी आयुर्वेदिक इलाज को अधिक भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस पहल से आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने में मदद मिलेगी और भविष्य में आयुर्वेदिक दवाओं के नए प्रयोग व पेटेंट का रास्ता भी खुलेगा। यह केंद्र आयुष विश्वविद्यालय को देश के प्रमुख शोध संस्थानों की कतार में खड़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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