सोनभद्र
अलोकतांत्रिक तरीके से लागू चारों श्रम संहिताएँ तुरंत वापस ले सरकार
”रेणुकूट (सोनभद्र) (जयदेश)। आज़ादी से पहले और बाद के लंबे संघर्षों के बाद श्रमिकों द्वारा हासिल किए गए 44 केंद्रीय श्रम कानूनों में से 29 कानूनों को हटाकर केंद्र सरकार ने उन्हें चार नई श्रम संहिताओं में समेट दिया है। बड़े-छोटे सभी श्रमिक संगठनों के व्यापक विरोध के कारण ये संहिताएँ अब तक लागू नहीं हो पाई थीं, लेकिन बिहार चुनाव में भारी जीत के बाद भारत सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 को इन संहिताओं को एकतरफा, मनमाने और अलोकतांत्रिक तरीके से लागू कर दिए जाने से मजदूरों में गहरा असंतोष फैल गया है।
केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर बुधवार को विभिन्न यूनियनों के संयुक्त मंच ने पिपरी स्थित उप श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएलसी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार इन श्रमिक-विरोधी और मालिक-समर्थक मानी जा रही सभी चारों श्रम संहिताओं को तत्काल वापस ले।
श्रमिक संगठनों का कहना है कि इन संहिताओं से बड़े पैमाने पर छंटनी का रास्ता खुलेगा, 12 घंटे की शिफ्ट अनिवार्य होगी, महिलाओं से रात में काम कराने का दबाव बढ़ेगा, बेरोजगारी और शोषण में इजाफा होगा, स्थायी रोजगार घटेगा और ट्रेड यूनियन, हड़ताल व संगठन बनाने जैसे अधिकार कमजोर हो जाएंगे। साथ ही पेंशन, ग्रेच्युटी, बोनस, पीएफ, बीमा व सुरक्षा जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार मजदूरों की बात नहीं सुनती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। कार्यक्रम में इंटक जिला अध्यक्ष हरदेवनारायण तिवारी, सीटू के नेता विषंभर सिंह, सुरेंद्र पाल, कामरेड लालचंद, राजेंद्र, शमीम अख्तर, खान-गुड्डू उपाध्याय, द्वारिका प्रसाद चंद्रवंशी सहित बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।
सभा को राजेश, प्रदीप कुमार सिंह, राजाराम भारती, राजपति साहनी, नवाज खान, कामरेड नीलम देवी, शिव प्रसाद खरवार, हरिशंकर गौड़, शंकर भारती, लालजी साहनी, कौशल्या देवी, मुन्नी देवी, कुंती देवी व कामरेड दीपक ने संबोधित किया।
