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गोरखपुर

वार्डेन की वापसी के विरोध में दर्जनों छात्राओं ने छोड़ा स्कूल

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गोरखपुर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, उसवाबाबू में एक संवेदनशील और तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। वार्डेन अर्चना पांडेय की दोबारा ज्वाइनिंग को लेकर छात्राओं और अभिभावकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

छात्राओं के मन में वार्डेन के प्रति इतना अधिक भय और अविश्वास देखा गया कि बड़ी संख्या में छात्राओं ने विद्यालय छोड़कर घर जाने का निर्णय ले लिया। जबकि विभागीय अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर केवल 12 छात्राओं के स्कूल छोड़ने की पुष्टि की है, मीडिया सर्वेक्षणों के अनुसार यह संख्या 80 से अधिक बताई गई है।

कुछ दिनों पहले वार्डेन अर्चना पांडेय और छात्राओं के बीच विवाद गहरा गया था। छात्राओं की शिकायतों के बाद, उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए वार्डेन ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

उच्च न्यायालय ने वार्डेन को उनके पद पर पुनः ज्वाइन करने का आदेश दिया। हालांकि, छात्राओं और अभिभावकों के जबरदस्त विरोध के कारण उन्हें विद्यालय लौटने में कठिनाई हुई। इसके बाद वार्डेन ने अधिकारियों पर अदालत की अवमानना का मामला दर्ज कराया, जिसके बाद न्यायालय ने अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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सोमवार को डीसी बालिका पंकज सिंह और खंड शिक्षा अधिकारी सावन दुबे, न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए, वार्डेन को ज्वाइन कराने के लिए विद्यालय पहुंचे। उनके परिसर में पहुँचते ही विरोध-प्रदर्शन, नारेबाजी और तनाव का माहौल बन गया।

कई छात्राओं ने रोते हुए यह बात दोहराई कि वार्डेन उनके साथ बहुत कठोर व्यवहार करती हैं और उन्हें ‘तालिबानी’ जैसी सख्त सजाएँ देती हैं। अभिभावकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपनी बेटियों की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकते और इसलिए उन्हें स्कूल से वापस ले जा रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम से विद्यालय में शिक्षण कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वह न्यायालय के आदेश और छात्राओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं जनभावना के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करे। यह मामला केवल विद्यालय या वार्डेन का नहीं, बल्कि बालिका शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न बन चुका है। अब सभी की निगाहें उच्च स्तरीय निर्णय और इस विवाद के समाधान पर टिकी हुई हैं।

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