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गोरखपुर

15 लाख रंगदारी केस में नया ट्विस्ट, जांच के घेरे में डॉक्टर के दावे

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गोरखपुर। शहर में चर्चित 15 लाख रुपये की रंगदारी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पीड़ित डॉक्टर डॉ पंकज दीक्षित द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ कौस्तुभ से मुलाकात के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि जैसे-जैसे मामले की परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे कई सवाल भी सामने आ रहे हैं, जिनके जवाब अब पुलिस जांच से ही मिलेंगे।

डॉक्टर का आरोप है कि पिछले 5-6 दिनों से उन्हें लगातार फोन कॉल कर 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। उन्होंने कॉल करने वाले को अनजान बताया और खुद को धमकियों से डरा हुआ बताया। शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।

वहीं, इस मामले में एसपी सिटी अभिनव त्यागी का बयान चौंकाने वाला माना जा रहा है। उनका कहना है कि डॉक्टर और आरोपी पहले एक साथ काम कर चुके हैं और अब दोनों ने अपना-अपना काम अलग कर लिया है। इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को नया एंगल दे दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे तो डॉक्टर ने कॉलर को अनजान क्यों बताया?

मामले में दूसरा बड़ा सवाल शिकायत दर्ज कराने के समय को लेकर है। यदि कॉल कई दिनों से आ रही थी तो रिपोर्ट 16 तारीख को ही क्यों दर्ज कराई गई? क्या इसके पीछे कोई रणनीति थी या फिर डर और दबाव के कारण शिकायत देर से की गई? फिलहाल पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है।

सूत्रों की मानें तो पुलिस दोनों पक्षों के रिश्तों, कॉल रिकॉर्ड और घटनाक्रम की टाइमलाइन खंगाल रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया था कि अगर कोई गलत सूचना देकर फर्जी मुकदमा दर्ज कराता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में यह जांच अब दोनों पक्षों के लिए अहम बन गई है।

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फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अब नजर इस बात पर टिकी है कि गोरखपुर पुलिस की पड़ताल क्या सच सामने लाती है। क्या यह वाकई रंगदारी का मामला है या फिर किसी पुराने विवाद की नई पहल।

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