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गाजीपुर

हनुमान जी जीवन प्रबंधन के सर्वोत्तम गुरु, उनके आदर्शों से सीखें विद्यार्थी : सुजीत साइकिल

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सुंदरकांड पाठ, हवन-यज्ञ व भव्य आरती के साथ आस्था और उत्साह के बीच मनाई गई हनुमान जयंती

नंदगंज (गाजीपुर) जयदेश। ग्रामसभा बाघी कोटा परिसर स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण के बीच भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और कार्यक्रम ने एक भव्य उत्सव का रूप ले लिया। इस अवसर पर सुंदरकांड पाठ, हवन-यज्ञ, विधि-विधान से पूजन तथा भव्य आरती के साथ भगवान हनुमान का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ संपन्न कराया गया, जिसमें क्षेत्र के लोगों ने आहुति देकर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। सुंदरकांड पाठ के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए।

कार्यक्रम में कोटा स्कूल के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं ग्रामवासियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभी ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण किया। जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा, जिससे माहौल और भी आध्यात्मिक हो गया।

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इस मौके पर समाजसेवी एवं हनुमान भक्त सुजीत साइकिल ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान हनुमान केवल शक्ति और भक्ति के प्रतीक ही नहीं, बल्कि वे जीवन प्रबंधन (मैनेजमेंट) के भी सबसे बड़े गुरु हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जीवन अनुशासन, समर्पण, निष्ठा और लक्ष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। विद्यार्थियों को उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि लोक मान्यता के अनुसार वीर केसरीनंदन हनुमान का प्राकट्य त्रेतायुग के अंतिम चरण में चैत्र पूर्णिमा, मंगलवार, चित्रा नक्षत्र एवं मेष लग्न के शुभ संयोग में हुआ था। उनका जन्म वर्तमान झारखंड राज्य के गुमला जिले के आंजन नामक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक गुफा में हुआ माना जाता है।

अपने उद्बोधन में उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान जी का चरित्र हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने अन्याय और अधर्म का विरोध करते हुए सदैव सत्य का साथ दिया। सुग्रीव के प्रति उनकी निष्ठा और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति उनके महान व्यक्तित्व को दर्शाती है।

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हनुमान जी को अनुशासन, साहस, निडरता, बुद्धिमत्ता और कर्तव्यपरायणता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि आज के युवाओं और विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि छात्र हनुमान जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतार लें, तो वे निश्चित रूप से सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक हवन-यज्ञ एवं भव्य आरती के पश्चात हजारों की संख्या में उपस्थित बच्चों, शिक्षकों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समरसता और नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देने का कार्य किया।

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