गोरखपुर
सीनियर का भविष्य अधर में, जूनियर को मिली उड़ान
पूर्वांचल डेंटल कॉलेज में 2020 बैच के साथ शैक्षणिक अन्याय, छात्रों का टूटा धैर्य
गोरखपुर। जिले के गीडा औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-7 में स्थित पूर्वांचल डेंटल कॉलेज एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। यहां वर्ष 2020 बैच के छात्रों ने अपने साथ हो रहे कथित शैक्षणिक अन्याय को लेकर आवाज बुलंद की है। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन और संबद्ध विश्वविद्यालय की उदासीनता के कारण उनका भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है, जबकि उनसे बाद में दाखिला लेने वाले जूनियर छात्रों को परीक्षा और प्रमोशन का लाभ दिया जा रहा है।
छात्रों के अनुसार 2020 बैच की फाइनल ईयर परीक्षा वर्ष 2024 में ही संपन्न हो जानी चाहिए थी, लेकिन 2026 तक पहुंचने के बावजूद न तो परीक्षा कराई गई और न ही कोई ठोस तिथि घोषित की गई। वर्षों से परीक्षा का इंतजार कर रहे ये छात्र आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पढ़ाई पूरी होने के बाद भी डिग्री न मिलने से न तो वे आगे की पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही रोजगार के अवसरों का लाभ उठा पा रहे हैं।
छात्रों का दर्द केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। कई छात्रों का कहना है कि परिवार ने बड़ी उम्मीदों और आर्थिक त्याग के साथ उन्हें पढ़ाया, लेकिन आज वही छात्र घरवालों के सवालों के सामने खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। लगातार टलती परीक्षाओं और अनिश्चित भविष्य के कारण कई छात्र मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में पहुंच गए हैं।
पीड़ित छात्रों ने कॉलेज मैनेजमेंट, कॉलेज मालिक, डीन और प्रिंसिपल के साथ-साथ दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित और मौखिक रूप से अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ तारीखें बढ़ाई जाती रहीं।
इतना ही नहीं, डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि 2020 बैच की परीक्षा लंबित है, तो आखिर किस नियम और आधार पर जूनियर बैच को फाइनल परीक्षा देने की अनुमति दी गई। यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
छात्रों ने एक स्वर में मांग की है कि 2020 बैच की फाइनल परीक्षा की तिथि तत्काल घोषित की जाए और वर्षों से चली आ रही इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
छात्रों का कहना है “हम भी इसी कॉलेज के छात्र हैं, हमारा भी उतना ही अधिकार है। अगर सीनियर को पीछे धकेलकर जूनियर को आगे बढ़ाया जाएगा, तो यह शिक्षा नहीं बल्कि हमारे सपनों की हत्या है।”
अब देखना यह होगा कि कॉलेज प्रशासन, विश्वविद्यालय और संबंधित नियामक संस्थाएं इन छात्रों की पीड़ा को कब तक अनसुना करती हैं, या फिर उन्हें समय रहते न्याय मिल पाएगा।
