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गोरखपुर

सरकारी रास्तों के साथ पोखरा–गढ़ही पर कब्जे का आरोप

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फसल कटने तक पैमाईश स्थगित; न्याय की गुहार लगाता सेमरडाडी का एक ग्रामीण

गोरखपुर। जनपद के खजनी तहसील अंतर्गत राजस्व ग्राम सेमरडाडी में मंगलवार को सरकारी नजूल भूमि, सार्वजनिक रास्तों के साथ-साथ गांव के पोखरा व गढ़ही को लेकर गंभीर मामला सामने आया। राजस्व विभाग के हल्का लेखपाल श्री अमरेश पांडेय एवं कानूनगो श्री प्रवीण कुमार राय द्वारा ग्राम की सरकारी नजूल भूमि एवं सार्वजनिक रास्तों पर पैमाईश की प्रक्रिया शुरू की गई।

फसल बनी बड़ी बाधा

पैमाईश के दौरान सार्वजनिक रास्तों पर गेहूं, सरसों, आलू और मटर की खड़ी फसल होने के कारण काफी दिक्कत और अवरोध उत्पन्न हुआ। इससे राजस्व कार्य प्रभावित हुआ और मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

फसल कटने तक लिखित सहमति

आवेदनकर्ता ने राजस्व विभाग से फसल कटने तक पैमाईश स्थगित करने का अनुरोध किया, जिसे लेकर उसने लिखित सहमति भी दी। आवेदनकर्ता ने स्पष्ट किया कि यह सहमति केवल फसल कटने तक ही है, उसके बाद पूरी पैमाईश कराना अनिवार्य है।

पुलिस प्रशासन की निगरानी जरूरी

आवेदनकर्ता का कहना है कि फसल कटने के बाद गांव की समस्त सरकारी नजूल भूमि, सार्वजनिक रास्तों के साथ-साथ पोखरा और गढ़ही की पैमाईश निहायत आवश्यक है। यह कार्य पुलिस प्रशासन की निगरानी में कराया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।



पोखरा और गढ़ही पर भी अतिक्रमण का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पारंपरिक पोखरे और गढ़ही, जो जल निकासी, पशुओं और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं, उन पर भी प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। पोखरा–गढ़ही का अस्तित्व खत्म होने से गांव में जलभराव, सिंचाई और पेयजल जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

दबदबा और धमकी का माहौल

आवेदनकर्ता ने आरोप लगाया कि एक संगठित परिवार जिला स्तर तक पहुंच, डीएम–कमिश्नर तक “देख लेने” की धमकी, और पूर्व मुख्यमंत्री से पारिवारिक संबंधों का हवाला देकर गांव में दबदबा बनाए हुए है। जान-माल की धमकी दिए जाने से पीड़ित परिवार भय और मानसिक तनाव में है।

पंचायत राज से जारी कब्जे का सिलसिला

ग्रामीण का कहना है कि पंचायत राज की शुरुआत से ही एक ही परिवार के लोग ग्राम प्रधान पद पर काबिज रहे हैं, जिसके चलते गांव की सरकारी नजूल भूमि, सार्वजनिक रास्ते, पोखरा और गढ़ही तक पर कब्जा कर लिया गया।

स्कूल और मतदान बूथ का रास्ता भी प्रभावित
जिन सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण बताया जा रहा है, वही रास्ते सरकारी स्कूलों और चुनाव के समय मतदान बूथ तक जाते हैं। इससे बच्चों, शिक्षकों और मतदाताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

खुद भी तोड़ने को तैयार

आवेदनकर्ता ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि जांच में उसका भी कोई अतिक्रमण निकलता है, तो वह स्वयं अपना मकान या चारदीवारी तोड़ने को तैयार है, लेकिन उसे निष्पक्ष न्याय चाहिए।

शासन से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण सरकारी नजूल भूमि, सार्वजनिक रास्ते, पोखरा और गढ़ही की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अतिक्रमण हटाकर गांव को उसका हक दिलाया जाए। यह मामला अब केवल जमीन का नहीं, बल्कि गांव के भविष्य, पर्यावरण, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।

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