चन्दौली
सकलडीहा में कूड़े का अंबार, स्वच्छ भारत मिशन के दावे खोखले

चंदौली। विकासखंड सकलडीहा के नागेपुर सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में कूड़ा निस्तारण की समस्या गंभीर होती जा रही है। भूमि चिन्हांकन न होने के कारण गांवों और सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता बनाए रखने के दावे यहां बेमानी साबित हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सकलडीहा तहसील और ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद आसपास के गांवों में कूड़ा निस्तारण केंद्र की व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है। नागेपुर, तेन्दुई, टिमिलपुर और ईटवा ग्राम सभाओं में भूमि की अनुपलब्धता के कारण कूड़ा निस्तारण केंद्र नहीं बन सका है। हैरानी की बात यह है कि इन केंद्रों के निर्माण के लिए ग्राम सभा में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, फिर भी प्रशासन की लापरवाही के चलते समस्या जस की तस बनी हुई है।
कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था न होने से दर्जनों गांवों का कूड़ा सकलडीहा बाजार की सड़कों पर जमा हो रहा है। बाजार में खरीदारी करने आने वाले ग्राहक, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अधिवक्ता और आम लोग दुर्गंध से परेशान हैं। लोगों को नाक और मुंह ढककर गुजरने की मजबूरी है। स्थानीय निवासियों को संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि सुबह-शाम सड़कों पर बिखरे कूड़े के कारण आवागमन दूभर हो गया है। लोगों ने तहसील प्रशासन से जल्द से जल्द कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं, स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है। एडीओ पंचायत बजरंगी पांडेय ने बताया कि जैसे ही भूमि आवंटन होगा, कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण कराया जाएगा।
इस मुद्दे पर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कुंदन राज कपूर ने कहा कि जल्द ही राजस्व अधिकारियों के माध्यम से भूमि चिन्हांकन कराकर कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए जमीन आवंटित की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
फिलहाल, सकलडीहा क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण केंद्र की अनुपलब्धता से स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की लापरवाही से स्वच्छता अभियान की पोल खुल रही है और लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।