वाराणसी
शीत ऋतु में पशुओं और पक्षियों को ठंड से बचाने के बताये गये उपाय
ठंड से बचाव के सुझाव
वाराणसी। शीत ऋतु के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने पशुओं और पक्षियों को ठंड से बचाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि ठंड के कारण पशु और पक्षी न्यूमोनिया, दस्त, पेट दर्द, श्वसन नली और फेफड़ों से संबंधित गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि दुग्ध, मांस और अंडा उत्पादन में भी कमी आ सकती है। अत्यधिक ठंड से मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है।

ठंड से बचाव के सुझाव:
रात्रि में पशुओं को सुरक्षित आवास के अंदर रखें। यदि आवास खुला है, तो उसे त्रिपाल या जूट के बोरे से ढक दें।
बंद आवास में वेंटिलेशन के लिए कम से कम एक खिड़की खुली रखें।
फर्श पर पराली का बिछावन डालें और उसे समय-समय पर बदलें।
वृद्ध, अशक्त और नवजात पशुओं की विशेष देखभाल करें।
पशुओं को सूर्योदय के बाद ही चरने के लिए छोड़ें। भेड़ और बकरियों को तभी बाहर ले जाएं जब पत्तियों से ओस सूख जाए।
ताजा और स्वच्छ जल पिलाएं।
ठंड शुरू होने से पहले पेट के कीड़े मारने की दवा दें और जरूरी टीकाकरण करवाएं।
जूट के बोरे का कोट बनवाकर पशुओं को पहनाएं।
आहार में हरा चारा, दाना और मिनरल मिक्सचर नियमित रूप से शामिल करें।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने किसानों और पशुपालकों से अपील की है कि वे इन निर्देशों का पालन कर पशुओं और पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
