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अपराध

शराब कारोबारी और उसके परिवार की हत्या में शक की सुई भतीजों की ओर

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सुबेंन्द्र छिपा तो शूटर्स ने दरवाजा तोड़कर मारी गोली 


वाराणसी | शहर के प्रतिष्ठित शराब कारोबारी राजेंद्र गुप्ता, उनकी पत्नी और तीन बच्चों की निर्मम हत्या की गुत्थी अब उलझती जा रही है। पांचों की कनपटी और सीने में गोली मारी गई है। गोली चलने की आवाज सुनकर छोटा बेटा सुबेंन्द्र बाथरूम में छिप गया था तो बदमाशों ने दरवाजा तोड़कर उसे गोली मार दी। घटनास्थल से लगभग 14 किलोमीटर दूर मीरापुर रामपुर स्थित निर्माणाधीन मकान में महिला के पति का अर्धनग्न शव मिला था, उसे भी गोली मारी गई थी। जिसमें एक गोली गर्दन के पास में और दूसरी गोली सीने पर मारी गई है। पुलिस की जांच में यह प्रोफेशनल शूटर्स द्वारा प्लानिंग के तहत मर्डर कराने की साजिश लग रही है।

पुलिस ने इस मामले में अब तक गुप्ता परिवार के परिचितों, राजेंद्र की वृद्ध मां, घर में काम करने वाली नौकरानी और पड़ोसियों से बातचीत की है। इस जांच में दो नए किरदार सामने आए हैं। राजेंद्र के दो भतीजे, जुगनू और विक्की। जिन पर शक की सुई आकर टिक गई है।

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पुलिस के प्रारंभिक जांच के अनुसार, जिस रात राजेंद्र और उनके परिवार की हत्या हुई उस समय जुगनू और विक्की को घर के आस-पास देखा गया था। दोनों भतीजे 27 साल पुराने उस हत्याकांड से भी जुड़े हैं, जिसमें राजेंद्र गुप्ता ने अपने ही भाई और भाभी की हत्या की थी। यह मामला उस समय प्रॉपर्टी विवाद का नतीजा बताया गया था। सूत्रों के अनुसार, एक आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जबकि दूसरा अब भी फरार है।




राजेंद्र ने की थी दो शादी, नीतू से किया था प्रेम विवाह

पुलिस के अनुसार, राजेंद्र ने दो शादी की थी। हाल के दिनों में एक अन्य महिला से भी उसकी करीबी बढ़ी थी। राजेंद्र की पहली पत्नी अपने बेटे के साथ कई साल से पश्चिम बंगाल के आसनसोल रहती है। इन्हीं सभी बिंदुओं को वारदात की वजह मान कर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से पुलिस की 10 टीमें जांच कर रही हैं।

राजेंद्र ने अपने पड़ोसियों और परिवार वालों के बीच में एक विवादास्पद छवि बनाई थी। पड़ोसियों के अनुसार, 28 साल पहले 1996 में उसने अपने छोटे भाई कृष्णा और उसकी पत्नी मंजू की हत्या संपत्ति के लालच में भाड़े के शूटरों से कराई थी। अगले ही साल 1997 में राजेंद्र पर अपने पिता लक्ष्मी नारायण गुप्ता और उनके चौकीदार की हत्या का आरोप भी लगा जिसकी शिकायत खुद राजेंद्र की मां शारदा देवी ने की थी। हालाँकि, अपनी मां को अपने पक्ष में कर के वह जेल से बाहर आ गया और कृष्णा व मंजू की हत्या का मामला भी धीरे-धीरे खत्म हो गया।

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जेल से बाहर आने के बाद 1999 में राजेंद्र ने अपने किरायेदार ब्राह्मण परिवार की एक लड़की नीतू से प्रेम विवाह किया। इस विवाह के बाद उसके परिवार ने उससे सारे संबंध तोड़ लिए। राजेंद्र के दादा, पन्ना साव अपने दौर में एक संपन्न व्यक्ति माने जाते थे। भदैनी इलाके के लोगों के अनुसार, पन्ना साव ने किराये पर 150 रिक्शा चला कर और अन्य चल-अचल संपत्तियां अर्जित कर संपन्नता हासिल की थी।

10 लाख से ज्यादा आता था किराया

बाबा और पिता के बूते ही राजेंद्र का भदैनी में आलीशान मकान और जमीन है। शिवाला में उसकी जमीन पर ही देसी शराब का ठेका है। किरायेदार भी रहते हैं। मीरापुर रामपुर गांव में वह मकान बनवा रहा था। इसके अलावा छित्तूपुर सहित कुछ जगहों पर जमीन खरीदी थी। राजेंद्र के करीबियों ने बताया कि भदैनी व शिवाला के किरायेदारों और शराब ठेका संचालक से प्रति माह राजेंद्र को 10 लाख रुपये से ज्यादा किराया मिलता था।

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