गोरखपुर
विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव, आरक्षण प्रक्रिया बनी सबसे बड़ी बाधा
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी और अहम जानकारी सामने आ रही है, जिसने ग्रामीण राजनीति की दिशा को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश में इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर होना मुश्किल माना जा रहा है और अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे।
प्रदेश की मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद नई पंचायतों के गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में देरी के कारण चुनाव कार्यक्रम घोषित करना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है।
इस देरी की सबसे बड़ी वजह पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन और आरक्षण प्रक्रिया का अधूरा होना बताया जा रहा है। पंचायत चुनाव में आरक्षण का निर्धारण एक संवेदनशील और अनिवार्य प्रक्रिया होती है, जिसे पूरा किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। अभी तक न तो आयोग पूरी तरह सक्रिय हो पाया है और न ही आरक्षण की अंतिम सूची जारी हो सकी है, जिससे पूरा चुनावी कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी महत्वपूर्ण हो गया है। प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल पूरी तरह सक्रिय हैं और उनका फोकस बड़े चुनाव पर केंद्रित है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों ही पंचायत चुनाव जैसे स्थानीय स्तर के चुनाव में अभी उलझना नहीं चाहते। यही कारण है कि राजनीतिक स्तर पर भी पंचायत चुनाव को टालने की रणनीति साफ नजर आ रही है।
वहीं दूसरी ओर, पंचायत चुनाव को समय पर कराने की मांग को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया है। इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई जारी है। अदालत का जो भी निर्णय होगा, उसका सीधा असर चुनाव की तारीखों और प्रक्रिया पर पड़ेगा।
इस पूरी स्थिति का असर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ देखा जा रहा है। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में अंतरिम व्यवस्था या प्रशासनिक नियंत्रण की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि गांवों में विकास कार्य और जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
कुल मिलाकर, पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम और अदालत के फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो पाएगा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव कब और किस रूप में कराए जाएंगे।
