वाराणसी
वाराणसी में पं. प्रदीप मिश्रा की कथा में अफरा-तफरी, पुलिस ने संभाली स्थिति
वाराणसी के डोमरी स्थित सतुवा बाबा गोशाला में पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महापुराण की कथा का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि धर्म और तीर्थ की राह में अनेक अड़चनें आती हैं। हर कदम के साथ बाधाएं और बंधन बनते हैं, लेकिन हमें इनसे पार पाना होता है।
पंडित मिश्रा ने कहा, “काशी हो या प्रयागराज, अयोध्या हो या मथुरा, हर तीर्थ की राह सहज नहीं होती। लेकिन अगर दृढ़ संकल्प लिया जाए तो भवसागर पार हो सकता है।” उन्होंने काशी विश्वनाथ के दरबार का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां खोटे सिक्के भी स्वीकार किए जाते हैं और जो यहां आकर श्रद्धा से माथा टेकते हैं, वे भवसागर पार कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।

इस बीच, देर रात कथा के समापन के बाद अचानक अफरातफरी मच गई। कथा समाप्त होते ही एक साथ बड़ी संख्या में लोग पंडाल से बाहर निकलने लगे, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। पुलिस ने तत्काल स्थिति को संभालते हुए भीड़ को शांत किया।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने श्रद्धालुओं से कहा कि जितने भी व्रत और उपवास करें, चाहे वह सोमवार या मंगलवार का हो, भगवान शिव समय के अनुसार सभी व्रतों का पुण्य देते हैं। शिवमहापुराण में हर समस्या का समाधान है।

कथा में पंडित मिश्रा ने भगवान शिव के महत्व को उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा, “जैसे बच्चा अपने पिता का हाथ पकड़कर मेला जाता है और हर चीज की मांग करता है, लेकिन यदि पिता का हाथ छूट जाए तो सिर्फ अपने पिता से मिलने की तड़प उसे विचलित कर देती है। ठीक वैसे ही भगवान शंकर का हाथ पकड़ने से संसार के सभी उलझनें आसान हो जाती हैं।”
कथा के अंत में स्कंद पुराण के अवंतिका खंड का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कर्कोटेश्वर महादेव का वर्णन किया गया। पंडित मिश्रा ने कहा कि कर्कोटेश्वर महादेव चौरासी महादेव में दसवें देवता हैं और हरसिद्धि माता के मंदिर में विराजमान हैं।
श्रद्धालुओं ने कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की झांकी का दर्शन किया और शिव के जयकारों से माहौल गूंज उठा।
