गोरखपुर
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुंद लाल गुप्ता का निधन
अधिवक्ता जगत ही नहीं, आम जनता ने भी खोया अपना मार्गदर्शक
गोरखपुर। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुंद लाल गुप्ता के आकस्मिक निधन से गोरखपुर सिविल कोर्ट परिसर शोक में डूब गया है। वर्षों तक न्याय के क्षेत्र में निष्ठा, ज्ञान और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने वाले मुकुंद लाल गुप्ता का जाना न केवल अधिवक्ताओं के लिए, बल्कि उन असंख्य आम नागरिकों के लिए भी अपूरणीय क्षति है, जिन्हें उन्होंने अपने विधिक ज्ञान से न्याय की राह दिखाई।
सिविल वादों में उनकी गहरी पकड़, कानून की बारीक समझ और शांत, सौम्य व्यवहार उन्हें अन्य अधिवक्ताओं से अलग पहचान दिलाता था। वे केवल एक अधिवक्ता नहीं थे, बल्कि युवा वकीलों के लिए मार्गदर्शक, पीड़ितों के लिए आशा की किरण और न्यायालय में मर्यादा व अनुशासन के प्रतीक थे।
उनके निधन की खबर मिलते ही न्यायालय परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। अधिवक्ताओं की आंखें नम थीं और आम वादकारियों के चेहरों पर गहरा दुख साफ झलक रहा था। कई लोगों ने कहा कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया है, जो कानून से पहले मानवता को महत्व देता था।
मुकुंद लाल गुप्ता का जीवन न्याय, सेवा और सादगी की मिसाल रहा। उनका जाना वह शून्य छोड़ गया है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। गोरखपुर बार और समाज ने एक सशक्त स्तंभ खो दिया है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, सहयोगियों और शिष्यों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
