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अपराध

वकील बनकर छुपा रहा था काला कारोबार, गिरफ्तारी से पहले किया महाकाल दर्शन

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वाराणसी। कोडिनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी में गिरफ्तार किए गए अमित सिंह टाटा की आपराधिक पृष्ठभूमि लगातार उजागर हो रही है। बताया गया कि वह कचहरी में अधिवक्ता भी है और पूर्व में कई गंभीर मामलों में आरोपी रह चुका है।

सूत्रों के अनुसार अमित सिंह टाटा का जुड़ाव कभी कुख्यात मुन्ना बजरंगी गैंग से भी रहा। उसके खिलाफ सात से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। एक समय वह सेंट्रल बार की प्रबंध समिति में भी रह चुका है। बार के पूर्व उपाध्यक्ष राजा आनंद ज्योति सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में टाटा पर जहर देने का आरोप लगाया गया था, जिसके संबंध में ज्योति के पिता ने थाना चौबेपुर में तहरीर दर्ज कराई थी।

शुभम जायसवाल से नजदीकी, राजनीतिक महत्वाकांक्षा

जांच में सामने आया है कि पिछले दो वर्षों से टाटा फरार चल रहे सरगना शुभम जायसवाल के संपर्क में था और तस्करी नेटवर्क को संचालित कर रहा था। बताया गया कि एक पूर्व सांसद के भरोसेमंद रूप में वह जौनपुर के रामपुर ब्लॉक प्रमुख पद की दावेदारी की तैयारी कर रहा था। पूरे वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी शुभम ने खुद संभाल रखी थी।

गिरफ्तारी से ठीक पहले किया महाकाल दर्शन

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जानकारी के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले टाटा अपने साथियों के साथ उज्जैन के महाकाल मंदिर दर्शन करने गया था। वहीं से उसे और एक बर्खास्त सिपाही को STF ने हिरासत में लिया। पर्याप्त सबूतों के आधार पर टाटा को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि पूर्व सांसद के प्रभाव में बर्खास्त सिपाही को छोड़ दिया गया।

अचानक बढ़ी आलीशान जीवनशैली

स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले डेढ़ वर्ष में टाटा तीन गाड़ियों फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो के काफिले सहित के साथ घूमते देखा जाता था। चर्चा है कि यह गाड़ियां उसे शुभम ने ही भेंट की थीं। शुभम की सुरक्षा कवच के रूप में उसे तैयार किया गया था ताकि अन्य गिरोह उस पर दबाव न बना सकें।

बड़े रसूखदारों के नाम भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों के अनुसार शुभम जायसवाल ने पूर्वांचल के कई प्रभावशाली नेताओं को लैंड क्रूजर एवं फॉर्च्यूनर जैसी कारें उपहार में दीं। उसके कई सहयोगियों व्यवसायियों व राजनीतिक व्यक्तियों के नाम सामने आने बाकी हैं। बताया जा रहा है कि शुभम ने अपने लैपटॉप में सभी का हिसाब सुरक्षित कर रखा था और साड़ी, होटल, बालू, कोयला, सरिया जैसे कारोबारों में भी उसका दखल बढ़ चुका था।

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जांच टीम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि यह गिरोह काफी बड़ा है। अमित सिंह टाटा तो केवल छोटा मोहरा है, अभी कई बड़े नाम पकड़े जाने बाकी हैं।

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