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वाराणसी

राजेंद्र प्रसाद घाट पर सजा मूर्खों का मेला, खूब लगे ठहाके

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वाराणसी। हर साल की तरह इस बार भी 1 अप्रैल के दिन राजेंद्र प्रसाद घाट पर मूर्खों का मेला लगा। इस खास मौके से रूबरू होने के लिए गंगा तट पर पहुंचे काशीवासियों के ठहाकों से घाट गूंज उठा। कौन कितना बड़ा मूर्ख ? इसके लिए व्यंग्यात्मक बाण चलें। मूर्ख दिवस पर महफ़िल जमी, तो कई राजफाश हुए। मूर्खों ने एक से बढ़कर एक व्यंग्य सुनाए और खूब तालियां भी बटोरी।

यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। लोगों के आकर्षण का केंद्र तब रहा जब कनस्टर-नगाड़ा साज पर गर्दभ राग गूंजा और बेमेल जोड़े की बरात सजी। गुदगुदाते मंत्रों, आड़े तिरछे यंत्रों से दूल्हन-दूल्हा की आगवानी की गई। जो नगाड़ों और गर्धभ स्वरों के बीच दो जोड़े वर और कन्या मंडप में पहुंचे। घाट पर मोमबत्ती के चारों ओर फेरे लिये गए। मजे की बात यह रही पुरुष दुल्हन के रुप में थी तो महिला दुल्हे के रुप में। उनके अगल- बगल था मूर्खो का जमावड़ा। गाजे-बाजे के साथ दुल्हन को विवाह मंडप में नाउन बने पुरुष उन्हें मंडप में लेकर आये। इस खास मौके को देखने के लिए विदेशी मेहमान भी घाट पर उपस्थित रहें। उनके लिए यह दृश्य कौतूहल का विषय था।

बेमेल शादी में मूर्खों के सम्मान के लिए सूप, कजरौटा, चलनी जैसे सामान भी लाए गए। इसे देखने के लिए घाट की सीढ़ियों पर मानों पूरी काशी समा गई। लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया।

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