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वाराणसी

मुखनिर्मालिका गौरी व विशालाक्षी माता को अर्पित हुआ दिव्य श्रृंगार, गूंजा जयघोष

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वाराणसी। चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन, जो श्री मुखनिर्मालिका गौरी को समर्पित माना जाता है, शहर में श्रद्धा और उत्साह के साथ पर्व का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं ने आस्था व्यक्त करते हुए मां के प्रति अपनी भक्ति अर्पित की। मंदिर के शास्त्रियों ने विधिविधान से मां मुखनिर्मालिका गौरी तथा शक्तिपीठ माता विशालाक्षी को वस्त्र एवं श्रृंगार सामग्री अर्पित की, जिसे उपहार स्वरूप उनके धारण हेतु प्रेषित किया गया।

आयोजन के दौरान परंपरा, श्रद्धा और सनातन आस्था का विशेष ध्यान रखा गया। बताया गया कि नवरात्र के शेष दिनों में भी मां गौरी के विभिन्न स्वरूपों के लिए निर्धारित तिथियों के अनुसार वस्त्र और श्रृंगार सामग्री श्री विश्वेश्वर से अवलोकित कराकर प्रतिदिन अर्पित की जाएगी। यह क्रम पूरे नवरात्र पर्व के दौरान निरंतर जारी रहेगा, जिससे श्रद्धालु अपनी भक्ति प्रकट कर सकें।

मां गौरी की उपासना भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखती है। चैत्र नवरात्र के दौरान देवी के विविध स्वरूपों की आराधना की जाती है, जो भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती है। इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखकर दिनभर भक्ति में लीन रहते हैं और मां की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

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काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां गौरी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की और आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

यह पर्व जहां धार्मिक आस्था का प्रतीक है, वहीं भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा और विविधता को भी दर्शाता है। इस दौरान श्रद्धालु एकत्र होकर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, जो सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देता है।

चैत्र नवरात्र का प्रथम दिन भक्ति और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें मां गौरी की महिमा का गुणगान किया गया। आगामी दिनों में भी इसी प्रकार के आयोजन जारी रहेंगे, जिससे श्रद्धालु देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना कर सकें और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकें।

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