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चन्दौली

मजलिसों का मकसद इस्लाम की सही तस्वीर पेश करना : मायल चंदौलवी

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आठ मुहर्रम को निकलेगा दुलदुल, अंजुमन-ए-मासूमिया ने किया कदीमी मातम

चंदौली। इमाम हुसैन का जिक्र और मजलिसों का मकसद इस्लाम की सही तस्वीर दुनिया के सामने पेश करने की कोशिश है। आज मुसलमान फिरकों में बंट कर खुद आगे आ गया और इस्लामी तालीम कहीं पीछे छूट गई है। अल्लाह ने फिरका परस्ती की कुरआन में सिर्फ बुराई नहीं की, बल्कि इसे गुनाहे अज़ीम करार दिया। रसूले अकरम मोहम्मद मुस्तफा का लक्ष्य एकजुटता थी। उन्होंने कबीलों में बंटे हुए अरबों को एक उसूल पर कायम कर एक कौम बना कर दुनिया को सच का पैगाम दिया। इस्लाम का पैगाम इंसानियत का पैगाम है और इंसानियत सिर्फ किरदार की पाकीजगी से इंसान में आती है।

उक्त बातें नगर पंचायत के गांधी नगर में स्थित अज़ाखाना-ए-रजा में जारी मजलिसों के दौर में बुधवार को मौलाना मोहम्मद मेंहदी ने कही। साथ ही मायल चंदौलवी, वकार सुल्तानपुरी, शहंशाह मिर्जापुरी समेत अलग-अलग वक्ताओं ने इस्लाम और आज के मुसलमानों पर अपने उन्वान पेश किए।

उन्होंने कहा कि रसूलल्लाह की सारी तालीम, सारा अमल इंसानियत बचाने के लिए था। इंसानियत के उसूलों का नाम इस्लाम है। इंसानी उसूल की ताकत इंसानों की एकजुटता से ही उभर कर सामने आती है। रसूल ने अपनी रिसालत के जरिए लोगों को एक साथ खड़ा किया तो बाद में मुसलमान दुनिया की लालच में आकर फिरकों में बंटते चले गए और आज भी यह सिलसिला जारी है। लोग अपने फिरकों को लेकर फख्र करते हैं, जबकि यह अफसोस की बात है।

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इमाम हुसैन की कुर्बानी की दास्तां बयान करते हुए मौलाना ने कहा कि ऐसा नहीं था कि इमाम हुसैन अपने साथ एक बड़ी फौज नहीं ला सकते थे। जब वह मक्का से चले तो हजारों लोग उनके साथ थे। लेकिन इमाम हुसैन ने हर मंजिल पर उन्हें आगाह किया कि मैं किसी हुकूमत के लिए नहीं जा रहा हूं, मैं इस्लाम की हिफाजत में अपनी जान देने जा रहा हूं। जो इसके लिए अपनी गर्दन कटा सकता है, वह मेरे साथ चले। किसी अच्छे मकसद के लिए जान देना आसान बात नहीं होती, तो लोग कटते गए और कर्बला में इस्लाम को बचाने के लिए सिर्फ बहत्तर लोग ही नजर आए।

अज़ाखाना-ए-रज़ा में इस मौके पर गाग खुर्द बनारस से आई अंजुमन-ए-मासूमिया ने अपना कदीमी मातम पेश कर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश किया। बनारस की दूसरी अंजुमन हुसैनिया ने अपने पुरखुलूस अंदाज में नौहाख्वानी करते हुए कर्बला के मसायब पेश किए। सैम हॉस्पिटल के प्रबंधक डॉ. सैयद गजन्फर इमाम ने बताया कि मुहर्रम की आठ तारीख को अजाखाना-ए-रज़ा दुलदुल में जुलूस निकलेगा। इसमें सभी धर्मों के लोग शिरकत करेंगे।

इस मौके पर बुद्धुलाल निगम, चमन, अजय कुमार, पंकज शर्मा, इंसाफ, रहमत अली, इरशाद भाई, सरवर भाई, वसीम अहमद, इमरान परवेज, लाडले, आसिफ, राजू टाइगर, तमसीर मिल्की, मोहम्मद इंसान, दानिश, वकार सुल्तानपुरी, सैयद अली इमाम, मायल चंदौलवी, काशिफ, जीशान हैदर आदि मौजूद रहे।

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