वाराणसी
बीएचयू कैंपस में पेड़ों की कटाई को लेकर एनजीटी ने अपनाया कड़ा रूख
वाराणसी के बीएचयू कैंपस में पेड़ों की कटाई को लेकर एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया है और इसे विश्वविद्यालय की छवि पर गहरा धब्बा बताया है। नई दिल्ली में एनजीटी की चार सदस्यीय पीठ ने सात चंदन के पेड़ों समेत अन्य पेड़ों के कटाई मामले पर सोमवार को सुनवाई की जिसमें बीएचयू को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी। याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने बीएचयू से कहा कि अन्य सभी का जवाब आ गया है लेकिन आपका नहीं जो एक कैजुअल रवैया दर्शाता है।
डीएफओ को भी निर्देश दिया गया कि वे जांच करें कि बीएचयू में लगाए गए पेड़ों का सर्वाइवल रेट क्या है। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने बीएचयू की आलोचना की और जब बीएचयू के अधिवक्ता ने सफाई देने का प्रयास किया तो एनजीटी ने रिपोर्ट के आधार पर कहा कि अब सफाई की कोई जरूरत नहीं है।
हालांकि बीएचयू के वकील ने चार सप्ताह का समय मांग जिसे ट्रिब्यूनल ने मंजूर किया। एनजीटी ने टिप्पणी की कि जिस विश्वविद्यालय का कार्य छात्रों को पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाना है वही कानून का उल्लंघन कर पेड़ काट रहा है जो उसकी छवि के लिए हानिकारक है।
