वाराणसी
बिजली बिलिंग की गड़बड़ी से उपभोक्ता परेशान
वाराणसी। जिले में बिजली निगम की बिलिंग व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती जा रही है। हालात यह हैं कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग उपकेंद्रों और विभागीय कार्यालयों में शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी वास्तविक खपत से कहीं अधिक यूनिट का बिल भेजा जा रहा है, लेकिन जब वे संशोधन के लिए संपर्क करते हैं तो जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है।
शहर और ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां करीब 200 यूनिट बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 700 यूनिट या उससे अधिक का बिल थमा दिया गया है। अधिक बिल को लेकर जब लोग निगम कार्यालय पहुंचते हैं तो कर्मचारियों की ओर से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि बिलिंग का काम एजेंसी के जिम्मे है, इसलिए निगम कुछ नहीं कर सकता।
बिजली निगम ने बिलिंग का कार्य इनवेंटिव नामक कंपनी को सौंप रखा है। यह कंपनी शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ताओं के घरों में लगे मीटर की रीडिंग लेने, बिल तैयार करने और बिल जमा कराने की जिम्मेदारी निभाती है। हालांकि, कंपनी के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जिले भर के उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर कर्मचारी मीटर रीडिंग के लिए घर तक गए बिना ही अनुमान के आधार पर यूनिट दर्ज कर बिल तैयार कर रहे हैं।
ऐसा ही मामला सारनाथ निवासी राकेश का सामने आया है। उनके घर पर हर महीने लगभग 200 यूनिट बिजली की खपत होती है, लेकिन इस बार उन्हें 700 यूनिट का बिल भेज दिया गया। इसी तरह के कई मामले रोजाना खंड कार्यालयों और उपकेंद्रों पर देखने को मिल रहे हैं। शिकायत करने पर उपभोक्ताओं को यही जवाब दिया जाता है कि बिलिंग की जिम्मेदारी एजेंसी की है।
इनवेंटिव कंपनी की ओर से जिले के 62 उपकेंद्रों पर तैनात पुराने कंप्यूटर ऑपरेटरों को हटाकर नए ऑपरेटरों की नियुक्ति की गई है। कंपनी ने विद्युत वितरण मंडल प्रथम और द्वितीय में 30-30 तथा ग्रामीण मंडल में दो ऑपरेटरों की तैनाती की है। इन ऑपरेटरों को 17,109 रुपये मासिक वेतन दिया जाएगा, जिसमें से पांच प्रतिशत राशि कंपनी के कमीशन के रूप में जाएगी।
उगापुर उपकेंद्र क्षेत्र में रहने वाले नगर निगम में तैनात राकेश सिंह ने बताया कि उनके यहां आज तक मीटर रीडिंग के लिए कोई नहीं आया। इसके बावजूद इस महीने उन्हें 2,031 रुपये का बिल मिला है, जबकि आमतौर पर उनका बिल 700 से 800 रुपये के बीच आता रहा है। वहीं, केसरीपुर निवासी सुनीता तिवारी ने बताया कि उनका कनेक्शन पहले ग्रामीण श्रेणी में था, जो अब शहरी कर दिया गया है। लोहता उपकेंद्र से उनके घर बिजली आपूर्ति होती है, लेकिन वहां भी कोई रीडिंग लेने नहीं आता। इसके बावजूद उन्हें 9,400 रुपये का बिल भेज दिया गया।
इस संबंध में मुख्य अभियंता राकेश कुमार का कहना है कि उपभोक्ताओं को गलत बिल से राहत दिलाने के लिए उनके घरों में प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं के यहां अभी प्रीपेड मीटर नहीं लगे हैं और जिनका बिल अधिक आ रहा है, वे संबंधित उपकेंद्र पर आवेदन देकर बिल संशोधन करा सकते हैं। नियमानुसार उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा।
