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वाराणसी

पुलिस अधीक्षक के द्वारा संपादित “सनातन धर्म” पुस्तक पर कुलपति के विचार

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पुलिस विभाग में ऐसे विचार से भारतीय जनमानस में नव चेतना का संचार होता है– कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा।

सनातन धर्म एवं दर्शन मानव को मानव से जोड़ने में विश्वास करते हैं— पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार मिश्र।

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सनातन धर्म के मूल तत्व सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, दान, जप, तप, यम-नियम आदि हैं जिनका शाश्वत महत्व है। अन्य प्रमुख धर्मों के उदय के पूर्व वेदों में इन सिद्धान्तों को प्रतिपादित कर दिया गया था।
उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने आज सुल्तानपुर के पुलिस प्रशिक्षण कालेज के पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार मिश्र के सनातन धर्म संग्रह के पुस्तक प्राप्त करने पर व्यक्त किया।
कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म हिंदू धर्म का एक संप्रदाय है जिसका उपयोग आम हिंदू धर्म के साथ-साथ संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं में भी किया जाता है। पुलिस अधीक्षक श्री बृजेश मिश्र के द्वारा सनातन धर्म संस्कृति एवं भारतीयता के भाव से युक्त होकर कार्य किया जा रहा है इससे दया और कर्तव्य का भाव जागृत होता है, जीवन दर्शन भी इसी में समाहित है।पुलिस विभाग में कार्य करते हुए ऐसे रचनात्मक कार्य से जुड़े हैं जिसमें भारतीय जनमानस में नव चेतना का संचार, मानवतावाद,राष्ट्रवाद एवं धर्म की भावना जागृत किया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार मिश्र ने स्वंय लिखित “सनातन धर्म” संग्रह के पुस्तक की प्रति कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा को सौंपते हुए कहा कि मेरे द्वारा संस्कृत, संस्कृति एवं भारतीयता के साथ जुड़कर सनातन धर्म के विभिन्न आयामों पर विचार संग्रह तैयार किया गया है।इसके माध्यम से सनातन धर्म एवं दर्शन मानव को मानव से जोड़ने में विश्वास करते हैं, इसमें तप का महत्व आदि विषय शामिल किए गए हैं।
उपस्थित ज़न
उस दौरान कुलसचिव राकेश कुमार, न्याय शास्त्र के मर्मज्ञ प्रो रामपूजन पाण्डेय एवं अभियंता रामविजय सिंह आदि उपस्थित थे।

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