गोरखपुर
पुराने स्कूल वाहन चलाए तो रजिस्ट्रेशन रद्द, मान्यता पर भी खतरा
गोरखपुर। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शासन ने 15 वर्ष से अधिक पुराने स्कूल वाहनों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहनों को यदि बच्चों को ढोते हुए पकड़ा गया तो उनका पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही संबंधित विद्यालय की मान्यता भी समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग ने स्कूल वाहनों की निगरानी के लिए विशेष पोर्टल विकसित किया है, जिसके माध्यम से विद्यालय परिवहन प्रणाली की निगरानी, सत्यापन तथा सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जाएगा। सभी विद्यालयों के लिए शपथ पत्र के साथ निर्धारित सूचनाएं पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।
पोर्टल पर वाहन से संबंधित पंजीकरण क्रमांक, प्रकार, आयु, मॉडल, इंजन व चेसिस संख्या, स्वामी का नाम व पता, परमिट, बीमा, प्रदूषण और फिटनेस प्रमाण पत्र के साथ चालक का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। ‘उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली-1998’ के तहत स्कूल प्रबंधन को इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना होगा। एक से 15 अप्रैल तक विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन आयुक्त के निर्देश के क्रम में बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि स्कूली वाहनों की दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण फिटनेस का अभाव या त्रुटिपूर्ण फिटनेस होता है, जिसे सख्ती से नियंत्रित किया जाना आवश्यक है।
परिवहन आयुक्त के अनुसार विद्यालय यान वह वाहन है जो विद्यालय के स्वामित्व में हो या अनुबंध के तहत विद्यार्थियों के परिवहन के लिए उपयोग किया जाता हो। ऐसे सभी वाहनों का विवरण शपथ पत्र के साथ पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा, जो 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित होना चाहिए।
यह व्यवस्था जनपद के सभी विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगी, चाहे वे किसी भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त हों। चाहे वाहन विद्यालय का हो, किसी एजेंसी से अनुबंधित हो या किराये पर लिया गया हो, सभी को इन निर्देशों का पालन करना होगा।
संबंधित शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे परिवहन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर इन निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि स्कूल वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
