गाजीपुर
पुनीता सिंह खुशबू ने तीन बेसहारा बच्चों को लिया गोद
नंदगंज (गाजीपुर) । करण्डा ब्लाक के ग्रामसभा लीलापुर में मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक ऐसा दृश्य सामने आया की हर संवेदनशील व्यक्ति को भावुक कर दिया। समाजवादी महिला सभा की प्रदेश सचिव एवं सदर विधानसभा प्रभारी पुनीता सिंह खुशबू ने तीन बेसहारा बच्चों को गोद लेकर यह साबित कर दिया कि राजनीति केवल सत्ता और पद का नाम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद जगाने का माध्यम भी हो सकती है।
यह मार्मिक घटना उस समय हुई जब पुनीता सिंह खुशबू अपने पति, यादव महासभा एवं पिछड़ा दलित विकास महासंघ गाजीपुर के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव के साथ लीलापुर में आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं। खेल मैदान में उत्साह और उमंग का माहौल था। लेकिन तभी एक दृश्य ने पूरे वातावरण को गंभीर और भावुक बना दिया। एक नन्ही बच्ची अपने पिता को व्हीलचेयर पर बैठाकर धीरे-धीरे मैदान के किनारे घुमा रही थी।
यह दृश्य पुनीता सिंह खुशबू के मन को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने बच्ची को बुलाकर बातचीत कर परिवार के बारे में जानकारी लेने पर पता चला कि व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति गांव के शिक्षित शिक्षक चंद्रिका प्रसाद हैं। जो विगत दो वर्षों से लकवाग्रस्त हो गये हैं। बीमारी ने उनके शरीर को जकड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति कोभी चरमरा दिया है।घर में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। जो पढ़ाई में होनहार हैं, लेकिन आर्थिक अभाव के कारण उनका भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है। बीमार शिक्षक चंद्रिका की पत्नी दीपा देवी ने जब अपनी पीड़ा दवा खर्च,घर का खर्च व बच्चों के पढ़ाई बोझ को साझा करते करते रहो पड़ी।
परिवार की व्यथा सुनकर पुनीता सिंह खुशबू का संवेदनशील हृदय बिना किसी औपचारिक घोषणा एवं बिना दिखावे के मौके पर ही यह भरोसा दिलाया कि तीनों बच्चों की शिक्षा से जुड़ा सभी खर्च जैसे स्कूल फीस, किताबें, ड्रेस, कॉपी और अन्य शैक्षणिक सामग्री वह स्वयं वहन करेंगी। उनके इस फैसले में उनके पति सुजीत ने भी पूरा सहयोग देने की बात कही।
पुनीता सिंह खुशबू ने इस अवसर पर कहा कि जिस समाज में बच्चे मजबूरी के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हों, वह समाज आगे नहीं बढ़ सकता। ये बच्चे हमारे भविष्य हैं और इनके भविष्य की जिम्मेदारी लेना हमारा पुनीत कर्तव्य है।अपने तीनों बच्चों के पढ़ाई का सभी खर्च उठाने की बात सुनकर शिक्षक चंद्रिका प्रसाद और उनकी पत्नी दीपा की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़ें । गांव के लोगों द्वारा भी इस मानवीय पहल की बात सुनकर खुशबू की खुलकर सराहना की जा रही है।
