वाराणसी
तीस साल पुराने गबन केस में दो अभियंता समेत तीन को कोर्ट ने सुनाई सजा
सरकारी धन के गबन पर कार्रवाई
वाराणसी की विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने बलिया जिले में 1987-88 और 1988-89 के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से जुड़े ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के कामों में कथित कूटरचित मस्टररोल बनाकर सरकारी धन का गबन करने के आरोप में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। विशेष लोक अभियोजक के अनुसार तत्कालीन अवर अभियंता रविंद्र चौरसिया और शिवसरन सिंह के साथ-साथ श्रमिक प्रेमचंद राम (मेठ) को अदालत ने पाँच-पाँच साल की सजा सुनाई तथा प्रत्येक पर 36,000 रुपये अर्थदंड लगाया।
आरोप पत्र में कहा गया है कि आरोपियों ने फर्जी मस्टररोल बनाकर सरकारी खाते से पैसे निकालवाए, जिससे योजनात्मक कामों के लिए रखे गए सार्वजनिक धन का अनुचित लाभ उठा लिया गया। अदालत ने सबूतों और बहस के आधार पर भ्रष्टाचार व संबंधित आपराधिक धाराओं में दोष सिद्ध पाया और सजा का आदेश दिया। दोनों अभियंता अब सेवानिवृत्त एवं बुजुर्ग बताए गए हैं।
यह फैसला तीन दशक पुराने गबन के आरोपों पर लिया गया है, जो ऐसी लंबित जांचों और मुकदमों के परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा सकता है कि जाँच-प्रक्रिया लंबी अवधि के बाद भी निष्पक्ष तरीके से समाप्त हो सकती है। मामले के संवेदनशील और तकनीकी कागजी दस्तावेजों के विश्लेषण और गवाहियों को अदालत ने निर्णायक माना।
