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ट्रैफिक बना जीवनरक्षक, 10 मिनट की देरी से बची महिला की जान

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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुए Air India के विमान हादसे में जहां 241 से अधिक लोग मौत के मुंह में समा गए, वहीं एक महिला की जान सिर्फ 10 मिनट की देरी से बच गई। भरूच की रहने वाली भूमि चौहान 12 जून को लंदन लौटने वाली थीं, लेकिन अहमदाबाद के ट्रैफिक ने उन्हें फ्लाइट तक समय पर नहीं पहुंचने दिया। यह देरी उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रही।

भूमि दो साल बाद भारत आयी थीं और स्टडी वीजा पर अपने पति के पास वापस यूके लौट रही थीं। फ्लाइट दोपहर 1:10 बजे रवाना होनी थी, लेकिन बोर्डिंग प्रक्रिया 12:10 बजे ही बंद कर दी गई थी। भूमि 12:20 पर एयरपोर्ट पहुंचीं, पर चेक-इन बंद हो चुका था। उन्होंने अधिकारियों से विनती की, लेकिन उन्हें विमान में चढ़ने की अनुमति नहीं मिली।

जैसे ही वे एयरपोर्ट से बाहर निकलने लगीं, हादसे की सूचना मिली। विमान हादसे की खबर से कांपती भूमि ने ईश्वर को धन्यवाद दिया।

एयर इंडिया के अनुसार, विमान में 230 यात्री सवार थे, जिनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक थे। क्रू के 12 सदस्यों में दो पायलट शामिल थे।

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विमान का मलबा अहमदाबाद स्थित अतुल्य हॉस्टल पर गिरा। टुकड़े-टुकड़े हो चुके प्लेन से कई यात्रियों की जली हुई लाशें सड़क पर बिखर गईं, लेकिन मलबे में एक यात्री की भगवद्गीता सही-सलामत मिली।

इस हादसे में रमेश विश्वास कुमार इकलौते जीवित यात्री हैं, जो फ्लाइट की 11A सीट पर बैठे थे। उन्होंने बताया कि संभवतः दरवाजा टूटने से वे सीट समेत नीचे गिर पड़े। उन्हें कुछ याद नहीं, लेकिन वे खुद घटनास्थल से बाहर निकल आए। वर्तमान में वे सिविल अस्पताल अहमदाबाद में भर्ती हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल पहुंचकर रमेश से मुलाकात की और करीब 10 मिनट तक बातचीत कर हालचाल जाना।

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