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वाराणसी

जिले में मनाया गया विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस

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क्वीन्स कॉलेज में छात्रों को किया गया जागरूक

महिला संवासिनी गृह में निशक्त महिलाओं को दिया परामर्श

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आत्मविश्वास और भावनात्मक सहयोग बढ़ाना जरूरी

वाराणसी। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर शनिवार को लहुराबीर स्थित राजकीय क्वीन्स इंटर कॉलेज में गोष्ठी का आयोजन किया गया । इसके अतिरिक्त जैतपुरा स्थित महिला संवासिनी गृह पर निशक्त महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही आवश्यक उपचार सहित दवाएं प्रदान की गईं। चिकित्सकों ने आत्महत्या करने की सोच रहे लोगों के प्रति अपने अनुभवों, पीड़ित की मानसिक स्थितियां, उन्हें आत्महत्या करने की सोच से बाहर लाने के तरीकों के बारे में अनुभव साझा किए।
   जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मनोचिकित्सक डॉ रविंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में क्लीनिकल साईकोलोजिस्ट डॉ रविंद्र यादव व कम्यूनिटी नर्स अमृता द्विवेदी ने क्वीन्स इंटर कॉलेज व महिला संवासिनी गृह पर जानकारी दी। क्वीन्स इंटर कॉलेज में 12वीं कक्षा की करीब 50 छात्रों और संवासिनी गृह में करीब 40 निशक्त महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद, अधिक चिंतन आदि पर परामर्श दिया। डॉ रविंद्र कुशवाहा ने कहा कि ऐसे लोग जो समाज से कट रहे हों, जिनकी कोरोना में नौकरी चली गई हो, प्रतियोगी परीक्षा तैयारी कर रहे लेकिन परीक्षा में असफल हो रहे हों, किसी कारणवश कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हों तो उनकी काउंसलिंग कर उन्हें संबल दिए जाने की जरूरत है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह आत्महत्या की बात नहीं सोचेंगे। अक्सर युवा वर्ग में करियर सफलता या प्रतियोगी परीक्षा में निराशा मिलने, पारिवारिक कलह आदि के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। वर्तमान समय में आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं जिसकी रोकथाम करना बेहद आवश्यक है।
*मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी* का कहना है कि जीवन में जल्द से जल्द सब कुछ हासिल कर लेने की तमन्ना और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ है जिस वजह से घरेलू झगड़े, कर्ज, गरीबी, बेरोजगारी, प्रेम संबंध, तलाक आदि कारणों से लोग बेवजह मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं | इसमें जरा सी नाकामयाबी अखरने लगती है और लोग अपनी जिन्दगी तक को दांव पर लगा देते हैं | इसी को देखते हुए हर साल 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है | इसे मनाने का मकसद आत्महत्या को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना है। इसके जरिये यह सन्देश देने की कोशिश की जाती है कि आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है|

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