वाराणसी
जयेन्द्र सरस्वती जयंती पर काशी में विद्वानों का हुआ सम्मान
शंकराचार्य के योगदान को किया याद
वाराणसी। हनुमान घाट स्थित मठ में श्री कांचीकामकोटिपीठ के 68वें शंकराचार्य पूज्य जयेन्द्र सरस्वती जी की 91वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर काशी के विद्वानों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय तिब्बती उच्च शिक्षण संस्थान के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने संस्कृत काव्यपाठ प्रस्तुत कर सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा शंकराचार्य जी के गरीब, दलित और शोषित वर्गों की सेवा के उल्लेखनीय कार्यों को याद दिलाया।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी ने बताया कि शंकराचार्य जी ने सम्पूर्ण भारत की पदयात्रा कर सनातन धर्म और आध्यात्म के प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान दिया। वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी राजेन्द्र कुमार दूबे ने अपने उद्बोधन में काशी के पौराणिक महत्व और शंकराचार्य जी के इस नगरी से गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया।
मठ के प्रबंधक वी.एस. सुब्रहमण्यम मणि ने बताया कि जल्द ही वाराणसी और प्रयाग के मध्य गडौलीधाम में सनातन धर्म सेवाग्राम के अंतर्गत आधुनिक विषयों का अध्ययन-शिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जिसमें वेद पाठशाला भी संचालित होगी। अगले वर्ष से यह सम्मान समारोह यहीं आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी को साहित्य एवं व्याकरण शास्त्र में योगदान, प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी को शंकराचार्य साहित्य के प्रकाशन-सम्पादन, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र कुमार दूबे को पत्रकारिता व समाजसेवा तथा डॉ. शैलेन्द्रनाथ दीक्षित को वेद प्रचार-प्रसार में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
श्री पट्टाभिराम शास्त्री वेदमीमांसा अनुसंधान केंद्र के वेदपाठियों और श्री मुमुक्षु भवन वेदवेदांग महाविद्यालय के छात्रों ने श्रीमद्भगवद्गीता का पारायण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में कई संस्थाओं के प्रतिनिधि, काशी के गणमान्य नागरिक और विद्वान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
