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गाजीपुर

चकमलुक गांव में शुरू हुई सोनहरा माइनर की खुदाई, अफसरों की निगरानी में चला बुलडोजर

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दुल्लहपुर (गाजीपुर)। चार दशकों की लंबी प्रतीक्षा, अंततः खत्म हो गई। वर्ष 1978 में अधूरी छोड़ी गई सोनहरा माइनर की खुदाई अब वास्तविकता बन चुकी है। चकमलुक गांव में गुरुवार को जेसीबी मशीनों की गड़गड़ाहट के साथ डेढ़ किलोमीटर लंबी माइनर की खुदाई का कार्य शुरू हुआ। भीषण गर्मी और ग्रामीणों की भारी भीड़ के बीच, यह दिन गांव के इतिहास में एक नई इबारत के रूप में दर्ज हो गया।

सुबह 10 बजे से शुरू हुई कार्रवाई में चार जेसीबी मशीनें, चार कानूनगो, दस लेखपाल, सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम और भारी प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। उप जिलाधिकारी रवीश गुप्ता के निर्देशन में चला यह अभियान शाम 5 बजे तक निर्बाध रूप से संपन्न हुआ।

40 वर्षों से लंबित थी योजना
1978 की चकबंदी के बाद से ही सोनहरा माइनर की खुदाई अधूरी पड़ी थी। इस दौरान कई किसानों ने माइनर की जमीन पर खेती शुरू कर दी थी। पिछले चार वर्षों में सिंचाई विभाग ने तीन बार पैमाइश की कोशिश की, लेकिन हर बार भूमि विवाद और खूंटा खींचने की घटनाओं के चलते कार्य बाधित होता रहा।

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हाल ही में 27 मई को एसडीएम रवीश गुप्ता के नेतृत्व में पुनः पैमाइश शुरू की गई, जिसमें तहसीलदार देवेंद्र यादव, एसडीओ उपेंद्र प्रसाद, सहायक अभियंता धनंजय चौहान, जेई बलवंत यादव सहित प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही। हालांकि, उस दिन किसान विरोध के कारण काम फिर से रुक गया।

इस बार चाक-चौबंद थी तैयारी
गुरुवार को प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ मोर्चा संभाला। मौके पर दुल्लहपुर, भुड़कुड़ा और शादियाबाद थानों की पुलिस फोर्स, पीएसी वाहन तथा ग्राम प्रधान रमेश यादव, पूर्व प्रधान बाड्ड यादव और ग्रामीण प्रतिनिधियों की मौजूदगी में माइनर की खुदाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कराई गई।

ग्रामीणों में दिखा उत्साह, जगी नई उम्मीद
गांव के सैकड़ों लोग तपती धूप में भी मौके पर डटे रहे। वर्षों से जलसंकट झेल रहे क्षेत्र के लिए यह कार्य नई आशा की किरण बनकर आया है। ग्रामीणों ने इसे केवल खुदाई नहीं, बल्कि जनसहभागिता, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और पारदर्शिता की जीत बताया।

निष्कर्ष में, सोनहरा माइनर की खुदाई का कार्य न सिर्फ तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह ग्रामीण जागरूकता और प्रशासनिक दृढ़ता का प्रतीक भी बन गया है।

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