गाजीपुर
ग्रामीणों के जज्बे और जन सहयोग से बन रहे पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा
राजकुमार पांडेय ने भी की आर्थिक मदद
गाजीपुर (जयदेश)। ग्रामीणों और एक सेना से रिटायर्ड जवान ने मिलकर एक अनोखी पहल की है। वे बिना सरकारी मदद के मगई नदी पर पक्का पुल बना रहे हैं। यह पुल कयामपुर छावनी सहित कई गांवों को जोड़ेगा। जन-सहयोग से बन रहे इस पुल में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार पांडेय ने भी आर्थिक सहयोग किया। राजकुमार पांडे ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणो और पुल निर्माण समिति के लोगों ने उनसे संपर्क किया और आर्थिक सहयोग की बात कही। ग्रामीणों के जज्बे को देखते हुए हमने भी इस जन उपयोगी कार्य के लिए सहयोग करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों के हौसले ने सरकारी व्यवस्था को आईना दिखाने का भी काम किया है। वहीं आसपास के कई गांव के लोगों को इस पुल के बन जाने से काफी लाभ मिलेगा। इस दौरान कालिका यादव, रमाकांत यादव, दयाशंकर यादव आदि मौजूद रहे।
मालूम हो कि इसकी शुरुआत सेना से रिटायर्ड रविंद्र यादव द्वारा पुल निर्माण के लिए 10 लाख रुपए के योगदान से हुई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने 25 फरवरी 2024 को पुल का शिलान्यास किया। इसके बाद से लोगों का आर्थिक सहयोग लगातार मिलता रहा। 105 फीट लंबे इस पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
इंजीनियरिंग कोर से रिटायर्ड रविंद्र यादव और एक आर्किटेक्ट की देखरेख में पुल की डिजाइनिंग और निर्माण कार्य किया गया। स्थानीय लोगो के मुताबिक आजादी के बाद से ग्रामीण पुल के लिए शासन-प्रशासन से गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोग बांस का पुल बनाकर आवागमन करते हैं। बाढ़ के समय छोटी नाव का सहारा लेना पड़ता है। पुल न होने से जिला मुख्यालय की दूरी 10-12 किलोमीटर बढ़ जाती है। थाना मात्र 3 किलोमीटर दूर है। लेकिन सड़क मार्ग से जाने में 15 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। गांव के पास ही जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का गांव भी है। यह पहल बिहार के दशरथ मांझी की याद दिलाती है। जिन्होंने अकेले हथौड़ी और छेनी से पहाड़ काटकर रास्ता बनाया था।
