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वाराणसी

कृषि में क्रांति लाएगा चांद छाप नैनो यूरिया

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वाराणसी। देश की प्रमुख यूरिया उत्पादक कंपनी चांद छाप ने नैनो यूरिया के क्षेत्र में कदम रखते हुए कृषि में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है। पारंपरिक यूरिया की तुलना में अधिक प्रभावी और पर्यावरण के लिए अनुकूल चांद छाप नैनो यूरिया, किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।

राजातालाब, वाराणसी में सोमवार को किसानों, खाद डीलरों और ग्रामीणों की विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नैनो यूरिया की विशेषताओं और इसके लाभों पर एक शैक्षिक फिल्म और विज्ञापन गीत प्रस्तुत किए गए। उपस्थित लोगों ने इस प्रयास की सराहना की।

पर्यावरण और उत्पादन में सुधार लाएगा नैनो यूरिया

कार्यक्रम के दौरान चांद छाप नैनो यूरिया के जॉइंट प्रेसिडेंट एसकेपी गुप्ता ने बताया कि पारंपरिक यूरिया के उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को नैनो यूरिया कम करेगा। उन्होंने कहा कि खेतों में डाली जाने वाली दानेदार यूरिया का केवल 30% पौधे अवशोषित करते हैं, जबकि 70% नाइट्रस ऑक्साइड के रूप में हवा में मिल जाता है। यह ग्लोबल वार्मिंग और मिट्टी व जल प्रदूषण का कारण बनता है।

नैनो यूरिया की केवल आधे लीटर की बोतल, 45 किलो यूरिया के बराबर नाइट्रोजन प्रदान करती है। इसके इस्तेमाल से फसल उत्पादन में 3% से 8% तक बढ़ोतरी होती है और खेतों की उपजाऊ शक्ति भी संरक्षित रहती है।

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आसानी और किफायत से उपलब्धताचांद छाप नैनो यूरिया का उत्पादन किसानों की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। गुप्ता ने बताया कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यूरिया की बोरी पहुंचाने में कठिनाई और परिवहन लागत अब नैनो यूरिया की बोतल से कम हो जाएगी। यह न केवल लागत कम करेगा बल्कि किसानों की आय भी बढ़ाएगा।

प्रभावी वितरण प्रणाली

कंपनी ने अपने प्रदेश भर में फैले 300 से अधिक डीलर्स और 10,000 से अधिक रिटेलर्स के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि नैनो यूरिया हर किसान तक आसानी से पहुंचे।

उत्पाद की विशेषताएं और लाभ

किसानों की आय में वृद्धि।

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पर्यावरणीय प्रदूषण में कमी।

खेतों की उर्वरता का संरक्षण।

फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार।

इस अवसर पर चांद छाप नैनो यूरिया के अधिकारी आनंद कुमार सिंह, संतोष चौहान, श्याम नारायण रस्तोगी, भोले केशरी, और अशोक मौर्य सहित कई अन्य अधिकारी और डीलर्स उपस्थित थे।

चांद छाप नैनो यूरिया का यह कदम न केवल भारतीय कृषि में एक नई क्रांति लाने की दिशा में है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए धरती मां के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का भी वादा करता है।

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