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वाराणसी

काशी धर्म परिषद ने देश रक्षा का किया आह्वान

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धर्म और संस्कृति की रक्षा करने वाली सरकार चाहता है संत समाज
काशी धर्म परिषद ने देश बचाने के लिये पारित किये 9 प्रस्ताव
वाराणसी। सनातन सर्व समावेशी है। इसका घोषवाक्य दुनियां के किसी मत, पंथ, धर्म के पास नहीं है। विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो, इससे बड़ी मानवता और सेकुलरिज्म क्या हो सकता है ॽउपरोक्त बातें पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में पातालपुरी मठ, नरहरपुरा में आयोजित काशी धर्म परिषद में कही गयी। काशी धर्म परिषद में सभी सम्प्रदायों, अखाड़ा के महंत और संत उपस्थित थे। काशी धर्म परिषद में संतो ने सर्वसम्मति से विभिन्न प्रस्ताव पारित किया। पातालपुरी मठ के महंत बालक दास जी महाराज को सर्वसम्मति से काशी धर्म परिषद का अध्यक्ष घोषित किया।
काशी धर्म परिषद की अध्यक्षता करते हुए महंत बालक दास जी महाराज ने प्रस्ताव रखा कि–
• सभी विद्यालयों, विश्वविद्यालयों में वैदिक शिक्षा को अनिवार्य बनाया जाये।
• वैदिक गणित वैदिक विज्ञान को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाये।
• मठों और मंदिरों के संरक्षण के लिए अलग से विभाग बने।
• आक्रमणकारियों द्वारा तोड़े गए मंदिरों का पुनर्निर्माण किया जाये।
• वैदिक विद्यालयों को अनवरत शिक्षा दे रहे मठों को अनुदान दिया जाये।
• विश्वनाथ कॉरिडोर एवं श्रीराम जन्मभूमि निर्माण को पूर्ण समर्थन दिया गया।
• धर्मांतरण पर रोक लगे।
• इस्लामी कट्टरपंथ को रोका जाये।
• गांव-गांव में रामपंथ द्वारा बनवाये जा रहे श्रीराम परिवार मंदिर को काशी धर्म परिषद का समर्थन और मान्यता।
इन सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
इस अवसर पर मुख्य संवादकर्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कहा कि हम सभी भाग्यशाली हैं कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनते हुए देख रहे हैं। प्रभु सनातन धर्म से बहुत प्रसन्न हैं, तभी तो दंगा मुक्त समाधान दिया। सारी शैतान ताकतें एक ओर थीं, लेकिन कोई राम मंदिर बनने से रोक नहीं पाया। अखण्ड भारत के विभिन्न देशों में रह रहे अन्य धर्मों के लोग राम और कृष्ण की संतान हैं। यह अटल सत्य है, लेकिन कट्टरपंथी उनको जड़ों से अलग करने में लगे हैं। हम कब तक गाय कटते हुये, देश बंटते हुये देखेंगे। सनातन कभी साम्प्रदायिक नहीं हो सकता। सनातन ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो सबको लेकर चलने वाला है। आज की सरकार पहली सरकार है, जो राक्षसों का अंत करके सनातन धर्म का संरक्षण कर रही है। भारत का अन्दर और बाहर से विरोध हो रहा है, लेकिन यह संकेत दिख रहा है कि विश्व के कल्याण का रास्ता सनातन से ही निकलेगा। जो भगवे का अपमान करे, वो कभी संतों और भारतीय संस्कृति का सम्मान नहीं कर सकता। संतो ने सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना समर्थन दिया। संतो ने धर्म रक्षा के लिये सड़क पर उतरकर लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। भारत ने राजनैतिक द्वेष है। सेकुलर के नाम पर सनातन धर्म का उपहास किया जा रहा था। दुनियां तड़प रही थी कि सनातन का पालन करने वाला नेता कभी विश्व को मिलेगा कि नहीं, आखिर नरेन्द्र मोदी के रूप में नेता मिल गया। नवरात्रि, शिवरात्रि का व्रत रखने वाले नरेन्द्र मोदी सनातन धर्म के साथ विश्व का राजनैतिक नेतृत्व कर रहे हैं। सनातन धर्मियों के लिये उत्तर प्रदेश सुरक्षित नहीं था। आज संत का भेष भगवा ही दुनियां को रास्ता दिखा रहा है। काशी का आशीर्वाद धर्म के साथ चलने वालों को ही मिलेगा। यह सनातन धर्म की ही ताकत है कि इस धर्म को मानने वाला देश का नेतृत्वकर्ता कोरोना वायरस से दुनियां को बचा ले गया। सेकुलरिज्म के नाम पर केवल हिन्दू धर्म को खत्म करने का प्रयास किया गया। अब ऐसी सरकार है, जो सनातन धर्म के सम्मान को बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है।
काशी धर्म परिषद में महंत शर्वेश्वरण शरण दास, महंत ईश्वर दास, महंत श्रवण दास, महंत राम लोचन दास, महंत शियाराम दास, महंत धनुषधारी दास, महंत अवध बिहारी दास, महंत राजाराम दास, महंत राम दास, महंत महावीर दास, महंत राघव दास, महंत उमेश दास, महंत राम किशोर दास, अनिल शास्त्री, कोतवाल मोहन दास, सोनेश्वर दास, महंत अंकित दास आदि सैकड़ो संत महंत उपस्थित रहे।

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