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ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराया, मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ा

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नई दिल्ली। ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के युद्धविराम प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया है, जिससे मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और अधिक तीव्र हो गया है। एक समाचार एजेंसी ने अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार यह कूटनीतिक प्रस्ताव बुधवार को एक मध्यस्थ देश के जरिए भेजा गया था, हालांकि उस देश का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

कूटनीतिक प्रयासों की विफलता के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के ऊपर गिराए गए एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के चालक दल के एक सदस्य को सुरक्षित बचा लिया है। बचाया गया व्यक्ति जीवित है और उसका इलाज चल रहा है, जबकि अन्य कर्मियों की तलाश जारी है।

तकनीकी जानकारी के अनुसार गिराया गया विमान F-15E Strike Eagle था, जो एक दोहरी भूमिका वाला लड़ाकू विमान है और हवा से हवा तथा हवा से जमीन पर हमले करने के लिए तैयार किया गया है। सामान्यतः इस विमान को दो सदस्यीय दल संचालित करता है, जिसमें एक चालक और एक हथियार प्रणाली अधिकारी शामिल होता है।

इस घटना से जुड़े दावों को और मजबूत करते हुए आईआरआईबी ने सामाजिक मंच एक्स पर एक नक्शा साझा किया, जिसमें उस क्षेत्र को चिह्नित किया गया है जहां से पायलटों की खोज की जा रही है। हालांकि विमान के दुर्घटनास्थल की सटीक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन सीएनएन ने खुजेस्तान प्रांत में करुण नदी पर बने एक पुल के पास से मिले दृश्य के आधार पर इसकी संभावित स्थिति की पहचान की है। यह क्षेत्र तेहरान से लगभग 470 किलोमीटर दक्षिण में स्थित बताया गया है। दृश्य में कम ऊंचाई पर उड़ते विमान और हेलीकॉप्टर ऐसी संरचना में नजर आ रहे हैं, जो सामान्यतः हवा में ईंधन भरने के अभियानों के दौरान देखी जाती है। मौजूदा संघर्ष के दौरान यह पहली घटना बताई जा रही है, जब ईरान के ऊपर किसी अमेरिकी विमान को मार गिराया गया है।

वहीं, मलबे के प्रमाण सामने आने और खोज अभियान जारी रहने के बावजूद अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस ने अब तक पायलटों की स्थिति या दुर्घटना के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। आईआरआईबी का कहना है कि जैसे-जैसे स्थिति स्पष्ट होगी, पायलटों के बारे में भी जानकारी सामने आएगी।

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इधर, इजराइल ने बैरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। इजरायली सेना के अनुसार यह कार्रवाई उस समय की गई, जब हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में तीन अलग-अलग स्थानों पर इजरायली सैनिकों पर हमलों की जिम्मेदारी ली।

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि उनका देश अपनी रक्षा के लिए सभी क्षमताओं का उपयोग कर रहा है और अमेरिकी तथा इजरायली हमलों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह बात अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ दूरभाष पर हुई बातचीत के दौरान कही और यह भी उल्लेख किया कि जिस समय अमेरिका ने हमला किया, उस समय ईरान उसके साथ वार्ता कर रहा था।

ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने भी अमेरिका पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को पाषाण युग में वापस ले जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय और पाषाण युग में बड़ा अंतर है, क्योंकि उस समय पश्चिम एशिया में तेल और गैस का उत्पादन नहीं होता था।

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